'राक्षस था मेरा पोता...गिरफ्तारी का अफसोस नहीं', गाजियाबाद में नशेड़ी पोते की हत्या के बाद 79 वर्षीय दादा का कबूलनामा
गाजियाबाद के नंदग्राम में 32 वर्षीय आशु की हत्या का खुलासा हुआ है, जिसमें उसके 79 वर्षीय दादा और चाचा ...और पढ़ें

पुलिस के सामने आरोपित दादा और चाचा को साथ लेकर पुलिस ने की पुलिस कांफ्रेंस। वीडियो ग्रैब
HighLights
दादा और चाचा ने मिलकर की पोते की हत्या।
शराब, मारपीट और चोरी की आदतों से थे परेशान।
नींद की गोली खिलाकर दांव और डंडे से मारा।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। नंदग्राम के नूर नगर में शनिवार रात हुए 32 वर्षीय आशु उर्फ अश्वनी हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटे में पर्दाफाश कर दिया। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि आशु की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके 79 वर्षीय दादा और चाचा ने मिलकर की थी। दोनों आशु की शराब पीने, मारपीट करने और चोरी की आदतों से बेहद परेशान थे। गिरफ्तारी के बाद आरोपित दादा ने कहा, 'राक्षस था मेरा पोता। गिरफ्तारी का मुझे कोई अफसोस नहीं।'
बिजली की कटी लाइन ने खोली पोल
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी दादा भीम सिंह ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक झूठी कहानी रची। आरोपित दादा ने पुलिस को बताया कि शनिवार रात करीब 11:30 बजे बिजली न होने के कारण अंधेरा था। इसी दौरान तीन अज्ञात लोग नशे में धुत आशु को चारपाई पर लिटाकर भाग गए। रविवार सुबह जब वे आशु को चाय देने छत पर गए, तब उन्हें उसके मृत होने का पता चला।
पुलिस की सतर्कता से पर्दाफाश
पुलिस ने जब क्षेत्र की बिजली व्यवस्था की पड़ताल की, तो पाया कि घटना के समय पूरे इलाके में बिजली आ रही थी। केवल आशु के घर की बिजली बिल न भरने के कारण पहले से कटी हुई थी। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की, तो बुजुर्ग दादा टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मामले में पुलिस ने आरोपी दादा भीम सिंह (79) और चाचा राकेश (48) को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेज दिया है।
'राक्षस था मेरा पोता, नहीं कोई पछतावा'
पोते की हत्या के आरोपी 79 वर्षीय भीम सिंह के चेहरे पर शिकन तक नजर नहीं आई। सोमवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका पोता 'राक्षस' बन चुका था और उसने पूरे परिवार का जीना दुश्वार कर रखा था। आशु कोई कामकाज नहीं करता था और दिनभर शराब के नशे में घर का सामान बेच देता था या परिजनों के साथ मारपीट कर रुपये छीन लेता था।
शराब की लत के कारण बेचना पड़ा मकान
पूछताछ के दौरान भीम सिंह ने बताया कि आशु की शराब की लत और मांगों को पूरा करते-करते वे भारी कर्ज में डूब गए थे। कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने अपना मकान 9 लाख रुपये में बेचा था। इस राशि में से 6 लाख रुपये लोन के चुकता किए गए और 1.5 लाख रुपये आशु द्वारा शराब के लिए गए कर्ज को चुकाने में खर्च हुए। इसके बावजूद आशु के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया और वह लगातार मारपीट करता रहा। हाल ही में आशु ने अपने दादा का मोबाइल चुराकर बेच दिया था, जिससे वह काफी नाराज थे।
नींद की गोली खिलाकर दांव और डंडे से मारा
शनिवार रात करीब 8:30 बजे आशु फिर से शराब के लिए रुपये मांगने लगा। दादा के मना करने पर वह धमकी देकर बाहर चला गया। तंग आकर भीम सिंह ने अपने बेटे (आशु के चाचा) राजेश के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
रात करीब 10 बजे जब आशु घर लौटा, तो आरोपियों ने उसे पानी में नींद की गोलियां मिलाकर दे दीं। रात 12 बजे जब वह बेहोश हो गया, तब दादा और चाचा ने दांव और डंडे से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद बुजुर्ग भीम सिंह रातभर उसी घर में रहे, जिसकी छत पर उनके अपने पोते का शव पड़ा था।
