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गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, कम इंसेंटिव वाले कर्मचारियों की हो सकती है बर्खास्तगी

Published: Sat, 24 Oct 2026 04:28 PM (IST)

स्वास्थ्य विभाग उन स्वास्थ्यकर्मियों को चिन्हित कर रहा है जो काम में लापरवाही कर रही है। गाजियाबाद में जीरो भुगतान वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है।

जीरो इंसेंटिव वाली आशा कार्यकर्ताओं पर सख्ती, जागरण आर्काइव।

 जीरो इंसेंटिव वाली आशा कार्यकर्ताओं पर सख्ती, जागरण आर्काइव।

HighLights

  1. स्वास्थ्य विभाग कम इंसेटिव वाले स्वास्थ्यकर्मियों को चिन्हित कर रहा है।

  2. आशा कार्यकर्ताओं पर गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही का आरोप।

  3. जीरो भुगतान वाले स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा समाप्त करने की तैयारी।

मदन पांचाल, गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों को चिन्हित कर रहा है जो हर माह कम इंसेटिव ले रहे हैं। यहीं नहीं जीरो इंसेटिव भुगतान का पूरा विवरण बनवाया जा रहा है। इनमें आशा कार्यकर्ताओं के अलावा आशा संगिनी,एनएचएम कर्मी,चिकित्सक और एएनएम भी शामिल है।

स्वास्थ्य विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का काम करने पर चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों को इंसेटिव मिलता है। सबसे अधिक इंसेटिव आशा कार्यकर्ताओं को दिया जाता है।

आशा कार्यकर्ताओं के काम पर सवाल

मेरठ मंडल में 21 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार मंडल के छह जिलों में कुल 7380 आशा कार्यकर्ता तैनात हैं। इनमें से 131 आशा कार्यकर्ताओं ने अप्रैल से सितंबर तक गर्भवती महिलाओं की एएनसी को लेकर कोई काम नहीं किया है।

इसी के चलते इनका इंसेटिव भगुतान जीरो पाया गया है। यह स्थिति तब है जबकि गर्भवती महिलाओं की हर महीने जांच अनिवार्य है। इतना ही नहीं जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने में भी आशा कार्यकर्ता आंख चुरा रहीं हैं।

अप्रैल से सितंबर तक जीरो इंसेंटिव

रिपोर्ट के अनुसार मंडल की 175 आशा कार्यकर्ताओं ने अप्रैल से सितंबर के बीच जननी सुरक्षा योजना के तहत कोई काम नहीं किया है। गाजियाबाद की 24 आशा कार्यकर्ताओं का जीरो इंसेंटिव भुगतान की रिपोर्ट में नाम आया है। समीक्षा बैठक में उक्त आशा कार्यकर्ताओं के खिलाफ पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं।

आशा कार्यकर्ताओं पर हो सकता है एक्शन

कम इंसेटिव एवं जीरो भुगतान वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्ती होगी। उक्त की सेवा समाप्त भी की जा सकतीं हैं। अधिकारी मान रहे है कि इंसेटिव का भुगतान न लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का काम बेहद खराब है। विभाग जांच करा रहा है कि संस्थागत प्रसव की जगह कहीं प्राइवेट हास्पिटल में प्रसव तो नहीं कराये जा रहे हैं।

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