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'महंगाई पर पड़ेगा असर', दिल्ली में BS-6 से नीचे के डीजल वाहनों पर बैन का ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने किया विरोध

Published: Sun, 25 Oct 2026 11:12 PM (IST)

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक नवंबर से BS-6 से नीचे के डीजल वाहनों पर रोक लगाई गई है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली में BS-6 से नीचे वाहनों पर प्रतिबंध।

  2. गाजियाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया।

  3. औद्योगिक उत्पादन और आजीविका पर गंभीर संकट की आशंका।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। दिल्ली में एक नवंबर से बीएस-6 (BS-VI) से नीचे के डीजल मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का गाजियाबाद महानगर गुड्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध किया है।

एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से न केवल ट्रांसपोर्टरों और चालकों की आजीविका पर संकट आएगा, बल्कि औद्योगिक उत्पादन और माल की आपूर्ति भी प्रभावित होगी।

90 प्रतिशत मालवाहक वाहन बीएस-6 से नीचे

एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष मैत्रेय ने दावा किया कि गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाले करीब 90 प्रतिशत मालवाहक वाहन बीएस-6 से नीचे की श्रेणी के हैं। प्रतिबंध लागू होने पर बड़ी संख्या में वाहनों के खड़े होने की आशंका है। इससे वाहन मालिकों पर ऋण की किस्तों और अन्य खर्चों का बोझ बढ़ेगा, वहीं चालकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

गाड़ियों के रोक पर फैक्ट्रियों में बढ़ेगी परेशानी

अध्यक्ष के अनुसार, गाजियाबाद की फैक्ट्रियों और कारखानों से बड़ी मात्रा में कच्चा माल और तैयार उत्पाद दिल्ली भेजे जाते हैं। वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से उद्योगों को समय पर कच्चा माल नहीं मिल सकेगा और तैयार माल की डिलीवरी में भी देरी हो सकती है।

इसका असर औद्योगिक उत्पादन, व्यापार और रोजगार पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि माल की आपूर्ति बाधित होने से बाजार में वस्तुओं की कमी और महंगाई बढ़ सकती है। वहीं, सीमित वाहनों के कारण मालभाड़ा बढ़ने की भी आशंका है।

एसोसिएशन ने सरकार से की मांग

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि प्रतिबंध लागू होने के एक महीने बाद प्रदूषण के स्तर में आई कमी के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। इसके अलावा प्रदूषण के अन्य स्रोतों का भी निष्पक्ष आकलन होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के साथ ट्रांसपोर्टरों, उद्योगों, व्यापारियों और आम जनता के हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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