सॉफ्टवेयर इंजीनियर के खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर 1.29 करोड़ का घोटाला, कोर्ट के आदेश पर FIR
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक खाते से 1.29 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप लगा है। पीड़ित ने ...और पढ़ें

HighLights
इंजीनियर के खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर 1.29 करोड़ निकाले।
आरोपी रंजीत कुमार और निजी बैंक पर FIR दर्ज।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जांच शुरू की।
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। इंदिरापुरम थानाक्षेत्र में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक खाता ट्रांसफर करने व उसमें 1.29 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले में कोर्ट के आदेश पर एक आरोपित समेत एक निजी बैंक के कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इंदिरापुरम के शक्तिखंड दो में रहने वाले आकाश सिंह गौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2022 में उनकी जान-पहचान रंजीत कुमार से हुई थी। दोनों में दोस्ती हुई और रंजीत ने उनके दो लाख रुपये उधार भी लिए। बाद में वर्ष 2024 में रंजीत ने उन्हें एक ट्रैवल कंपनी में निदेशक बनाया।
आरोप है कि रंजीत कुमार ने ट्रैवल कंपनी में रुपये लगवाने के नाम पर उनसे अलग-अलग किस्तों में कुल साढ़े तीन लाख रुपये ले लिए। जब वह लखनऊ गए हुए थे तो रंजीत कुमार ने नवंबर 2024 को हुई बोर्ड बैठक में उनके न होते हुए भी उनकी मौजूदगी दिखा दी।
जाली हस्ताक्षर बनाकर ट्रांसफर किया खाता
इसके साथ ही आरोपित ने ही जाली हस्ताक्षर बनाकर एक निजी बैंक की दिल्ली शाखा से खाता इंदिरापुरम शाखा में ट्रांसफर करा लिया। इस दौरान खाते में अपना मोबाइल नंबर अपडेट करा दिया। नेट बैंकिंग का एक्सेस अपने साथियों को दिला दिया। नवंबर 2024 में इस खाते से 1.29 करोड़ रुपये का लेनदेन अलग-अलग खातों में किया गया।
इस बीच फरवरी 2025 में उन्हें लुधियाना की साइबर क्राइम टीम से नोटिस मिला तो फर्जीवाड़े का पता चला। उन्होंने मार्च 2025 को कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की लेकिन पुलिस ने सुनवाई नहीं की।
इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य का कहना है कि मामले में कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
