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पोस्टरों से खुला था बड़ा आतंकी नेटवर्क, मैकेनिक के यहां बातचीत से बेनकाब हुआ जासूसी का जाल

By Vinit Edited By: Kapil Kumar
Published: Sat, 21 Mar 2026 05:33 AM (IST)Updated: Sat, 21 Mar 2026 06:58 AM (IST)

पुलिस ने छोटे सुरागों से बड़े आतंकी और जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टरों से ...और पढ़ें

मैकेनिक के यहां बातचीत से बेनकाब हुआ जासूसी का जाल। जागरण

मैकेनिक के यहां बातचीत से बेनकाब हुआ जासूसी का जाल। जागरण

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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। देश में बीते छह महीनों में पुलिस ने छोटे सुरागों से बड़े आतंकी और जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। अक्टूबर में श्रीनगर में जहां जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टरों ने पुलिस को आतंकी साजिश रचने वालों तक पहुंचाया।

वहीं, बीते सप्ताह गाजियाबाद में एक बीट कांस्टेबल को बाइक मैकेनिक की दुकान पर एक युवक से बातचीत के दौरान मिली जानकारी ने आतंकियों के जासूसी नेटवर्क की परतें खोल दीं। पुलिस ने शुक्रवार को प्रेस नोट जारी कर अपने सिपाही की मेहनत को सलाम किया है।

अक्टूबर में श्रीनगर के बनपोरा नौगाम क्षेत्र में लगे पोस्टरों में सुरक्षा बलों को धमकी दी गई थी। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज से संदिग्धों की पहचान हुई और पूछताछ में शोपियां से हरियाणा तक फैले एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पता चला। जिसमें फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के डाक्टर भी शामिल पाए गए।

गाजियाबाद में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही। मार्च की शुरुआत में कौशांबी क्षेत्र में तैनात बीट पुलिस अधिकारी (बीपीओ) सिपाही विनेश चौधरी को एक बाइक मैकेनिक की दुकान पर बैठे युवकों से बातचीत के दौरान एक युवक ने फोटो-वीडियो बनाकर पैसे कमाने की बात कही।

सिपाही ने सूचना संदिग्ध पाते हुए थाना प्रभारी तक पहुंचाई। इसके बाद उच्च अधिकारियों को बताया। यह इनपुट पुलिस के लिए अहम साबित हुआ। पुलिस ने प्रवीन को हिरासत में लेकर मोबाइल खंगाला तो रेलवे स्टेशन, सैन्य प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों की लोकेशन के फोटो-वीडियो मिले। साथ ही विदेशी नंबरों से चैट के साक्ष्य भी सामने आए।

ठिकानों की जानकारी जुटाकर भेज रहा था विदेश

इसके बाद पुलिस ने कड़ी दर कड़ी जोड़ते हुए सुहेल मलिक समेत छह को गिरफ्तार कर जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संवेदनशील ठिकानों की जानकारी जुटाकर विदेश भेज रहा था और इसके बदले पैसे ले रहा था। अन्य युवाओं को भी इस काम में जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

बीते वर्ष शुरू की थी बीट प्रणाली

पुलिस आयुक्त ने बीते वर्ष 24 अप्रैल को कानून-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने व अपराधों की रोकथाम को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बीट प्रणाली लागू की थी।

इसके तहत पूरे कमिश्नरेट क्षेत्र को 2131 बीटों में बांटा था। इनमें सिटी जोन में 640, ट्रांस हिंडन जोन में 693 और ग्रामीण जोन में 798 बीट बनाई। कुल 941 बीट उपनिरीक्षक और 1431 बीट पुलिस आफिसर (बीपीओ) नियुक्त किए। जिनकी जिम्मेदारी बीट क्षेत्र में निगरानी रखना, स्थानीय नागरिकों से संपर्क बनाए रखना तथा हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर सतर्क दृष्टि रखने की है।

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जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश बीट प्रणाली लागू होने से हुआ है। जहां एक बीट कांस्टेबल को जमीनी स्तर पर मिली एक छोटी सूचना ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े खतरे का समय रहते पर्दाफाश किया। अब एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य लिंक और संभावित विदेशी कनेक्शन की गहन जांच में जुटी हैं, ताकि पूरे तंत्र की परतें खोली जा सकें। - जे. रविंदर गौड, पुलिस आयुक्त गाजियाबाद

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