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गाजियाबाद में पासपोर्ट फर्जीवाड़े में बड़ी कार्रवाई, पोस्टमैन पर एफआईआर; थाने के मुंशी को किया निलंबित

Published: Mon, 02 Feb 2026 09:37 PM (IST)

गाजियाबाद में पासपोर्ट फर्जीवाड़े की जांच में पुलिस के दोहरे मापदंड सामने आए हैं। 22 फर्जी पासपोर्ट और 2 आवेदनों ...और पढ़ें

पुलिस ने फर्जीवाड़ा कर भोजपुर के पतों पर हासिल किए गए 22 पासपोर्ट। फोटो: सांकेतिक

पुलिस ने फर्जीवाड़ा कर भोजपुर के पतों पर हासिल किए गए 22 पासपोर्ट। फोटो: सांकेतिक

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विनीत कुमार, गाजियाबाद। पासपोर्ट फर्जीवाड़े में पुलिस की शुरुआती जांच को लेकर दोहरा मापदंड सामने आया है। दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की शिकायत पर दिसंबर में ही गाजियाबाद पुलिस ने फर्जीवाड़ा कर भोजपुर के पतों पर हासिल किए गए 22 पासपोर्ट और दो आवेदनों की जांच का अनुरोध किया था।

पुलिस की शुरुआती जांच में सबसे पहले पता चला कि इन सभी 24 पासपोर्ट आवेदकों के वेरिफिकेशन किन पुलिसकर्मियों ने किए हैं। पुलिसकर्मियों ने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई। रुपयों के लालच में बीट पुलिस अधिकारी यानि सिपाही ने बिना मौके पर जाए पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज के आवेदक को क्लीन चिट दे दी।

उसके आधार पर ही पासपोर्ट विभाग ने पासपोर्ट जारी कर दिए। डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने भोजपुर थाने के मुंशी दीपक को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि दीपक ने बिना बीपीओ को पासपोर्ट की पुलिस वेरिफिकेशन दिए खुद ही सरकारी टैब पर वेरिफिकेशन कर दिया था। अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच में सामने आया है कि भोजपुर थाने के मुंशी दीपक ने सरकारी टैबलेट का प्रयोग कर बिना बीपीओ के क्षेत्र में जाए पासपोर्ट वेरीफिकेशन पूरी कर दिया। हालांकि इसमें भी पुलिस के कामकाज में खामी का पता चलता है, क्योंकि जब बीट पुलिस अधिकारी पासपोर्ट जैसे देश की सुरक्षा से जुड़े अतिसंवेदनशील दस्तावेज की जांच में लापरवाही बरत रहे हैं तो अन्य जांच किस तरह करते होंगे इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

थाने में बेठकर मुंशी पासपोर्ट की जांच करेंगे और आईडी बीपीओ की प्रयोग होगी तो बीपीओ वेरिफिकेशन की बजाय क्या काम करेंगे। कई दिन से चल रही जांच के बाद भी सिर्फ एक मुंशी पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। डाक विभाग के पोस्टमैन की भूमिका सबसे आखिर में गड़बड़ी की है।

इसके बावजूद पुलिस ने पोस्टमैन को एफआईआर में आरोपित बनाकर गिरफ्तार किया लेकिन अपने पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच जारी होने का हवाला दिया है। जबकि सबसे पहले आरोपित पुलिसकर्मियों का पता पुलिस अधिकारियों को चल गया होगा।

उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा न चलाकर विभागीय कार्रवाई की तैयारी है। हो सकता है छह महीने में पुलिसकर्मी बहाल भी हो जाएं वहीं ऐसा ही अपराध करने वाला पोस्टमैन जेल भी जाएगा और मुकदमे का भी सामना करेगा। दोनों का अपराध एक जैसा है तब कार्रवाई भी एक जैसी होनी चाहिए।

जांच में दोषी पाए जाने पर किसी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। कानून सबके लिए बराबर है। थाने के मुंशी को जांच में गड़बड़ी करने पर निलंबित किया गया है। अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

- सुरेंद्रनाथ तिवारी, डीसीपी ग्रामीण

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