गाजियाबाद के वार्ड-26 में क्या बदलेगा सियासी समीकरण? कोर्ट ने BJP पार्षद राजकुमार का चुनाव किया निरस्त
गाजियाबाद के वार्ड-26 से भाजपा पार्षद राजकुमार की सदस्यता फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने के कारण ...और पढ़ें

गाजियाबाद नगर निगम के विजयनगर क्षेत्र अंतर्गत वार्ड-26 से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुने गए पार्षद राजकुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
HighLights
पार्षद राजकुमार की सदस्यता अदालत ने रद्द की।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ने का आरोप।
राजकुमार ने उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। नगर निगम के विजयनगर क्षेत्र अंतर्गत वार्ड-26 माधोपपुरा- सुंदरपुरी से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुने गए पार्षद राजकुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत के एक कड़े फैसले के बाद उनकी पार्षद पद की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। यह पूरा मामला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे चुनाव लड़ने और जीत हासिल करने से जुड़ा हुआ है।
जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती
मई 2023 में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में राजकुमार ने भाजपा के प्रत्याशी के रूप में वार्ड-26 से जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरेश जाटव को 211 मतों के अंतर से पराजित किया था। चुनाव परिणामों के आने के तुरंत बाद ही पराजित उम्मीदवार सुरेश जाटव ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें राजकुमार के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया
हालांकि, उस दौरान तकनीकी कारणों और जांच का विषय बताकर तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। जिसके बाद सुरेश जाटव ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और चुनाव याचिका दायर की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम सिंहल की अदालत ने इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने किस आधार पर सुनाया फैसला?
अदालत ने पाया कि प्रशासनिक और जिला स्तरीय जाति सत्यापन जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार राजकुमार मूल रूप से केवट-मल्लाह जाति से ताल्लुक रखते हैं, जो कि अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आती है। इसके बावजूद उन्होंने कथित तौर पर कोरी समाज का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर एससी के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ा था। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए अदालत ने राजकुमार का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। साथ ही, इस आदेश की प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग और जिलाधिकारी को अग्रेषित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
पार्षद ने सभी आरोपों को सिरे से नकारा
इससे आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। पार्षद की सदस्यता रद होने के बाद अब वार्ड-26 में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उपचुनाव या आगामी स्थिति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। क्योंकि निगम के मौजूदा कार्यकाल में अभी लगभग दो साल का वक्त शेष है। दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व पार्षद राजकुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार है।
अब क्या करेंगे विजयनगर वार्ड के बीजेपी पार्षद राजकुमार
उनका कहना है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरी जांच-पड़ताल और संतुष्टि के बाद ही उनका वैध जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। राजकुमार ने स्पष्ट किया है कि वे निचली अदालत के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देंगे।
