'डाॅ. साहब इस सांप ने मुझे काटा है...', अस्पताल में सांप लेकर घुसा युवक; एंटी-स्नेक वेनम लेने से किया इंकार
गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में एक युवक सांप के काटने के बाद उसे लेकर पहुंचा, जिससे अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टरों ...और पढ़ें

बाल्टी के भीतर से फन उठाकर घूमते सांप पर डॉक्टरों की नजर पड़ी, उनके होश फाख्ता हो गए। जागरण
HighLights
युवक सांप के साथ गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल पहुंचा।
डॉक्टरों ने एंटी-स्नेक वेनम देने की तैयारी की।
मरीज और परिवार ने इलाज से साफ इनकार किया।
मदन पांचाल, गाजियाबाद। शनिवार शाम के ठीक साढ़े सात बज रहे थे। जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में रोज की तरह गहमागहमी थी। तभी अस्पताल के दरवाजे से एक ऐसा शख्स दाखिल हुआ, जिसे देखकर वहां मौजूद हर इंसान का कलेजा मुंह को आ गया। विजयनगर के सिद्धार्थ विहार का रहने वाला 31 वर्षीय मोती हर प्लास्टिक की बाल्टी में फन उठाए फुफकारते सांप को लिए सीधा डॉक्टरों के केबिन की तरफ बढ़ रहा था।
बदहवासी में भागे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी
जैसे ही बाल्टी के भीतर से फन उठाकर घूमते सांप पर डॉक्टरों की नजर पड़ी, उनके होश फाख्ता हो गए। इमरजेंसी का मंजर पलभर में दहशत के अखाड़े में बदल गया। खौफजदा स्वास्थ्यकर्मी जान बचाकर बाहर की तरफ भागे। अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। फौरन सुरक्षा गार्डों को बुलाकर पहले उस बाल्टी और सांपों को अस्पताल के बाहर रखवाया गया, तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली।
जहर से ढहती सांसें, लेकिन इलाज से इनकार
सांप के काटने के असर से मोती की हालत लगातार बिगड़ रही थी। वह धीरे-धीरे बेहोशी की आगोश में समाने लगा। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसे एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) लगाने की पूरी तैयारी कर ली, लेकिन तभी एक नया ड्रामा शुरू हुआ। बेहोश होते मोती और उसके घरवाले अचानक इलाज कराने से साफ मुकर गए। वे घर जाने की जिद करने लगे। उन्हें समझाया गया, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे।
अंत में ईएमओ को बनानी पड़ी रेफरल स्लिप
ईएमओ डॉ. मुकेश ने उन्हें बहुत समझाया कि शरीर में जहर फैल रहा है और बिना इंजेक्शन जान बचनी नामुमकिन है, पर वे नहीं माने। आखिरकार मजबूरी में डॉक्टर को 'लापरवाही और मरीज की अपनी मर्जी' का हवाला देते हुए रेफरल स्लिप बनानी पड़ी और मोती अपने परिवार के साथ सांप लेकर अस्पताल से निकल गया।
जिले में सांपों की दहशत
- वन विभाग द्वारा रेस्क्यू: बीते एक साल में रिकॉर्ड 574 वन्य जीवों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 71 कोबरा, 62 वाइपर और 30 अजगर शामिल थे।
- अस्पताल पहुंचे मरीज: इस दौरान सर्पदंश का शिकार होकर 768 लोग सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने पर मजबूर हुए। इनमें से 4 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
पुलिस को दी गई सूचना
"मरीज के इस तरह बिना इलाज के जाने और घटना की पूरी लिखित जानकारी स्थानीय पुलिस को भेज दी गई है।"
-डॉ. राकेश कुमार, सीएमएस।
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