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गाजियाबाद में 8.55 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी घोटाला उजागर, 12 बोगस फर्मों का इस्तेमाल

Published: Mon, 02 Nov 2026 05:07 AM (IST)

गाजियाबाद में राज्य कर विभाग ने 8.55 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का पर्दाफाश किया है।

गाजियाबाद में 8.55 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी घोटाला उजागर ( फोटो स्रोत : जागरण)

गाजियाबाद में 8.55 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी घोटाला उजागर ( फोटो स्रोत : जागरण)

HighLights

  1. गाजियाबाद में 8.55 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी घोटाला पकड़ा गया।

  2. अनस इंटरप्राइजेज ने 12 दिल्ली की बोगस फर्मों का उपयोग किया।

  3. बिना बिल का 58 लाख का स्टॉक जब्त, 53 लाख आईटीसी ब्लॉक।

हसीन शाहजहां, गाजियाबाद। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) रेंज-बी की जांच में 8.55 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) लेने का मामला सामने आया है।

शहीद नगर स्थित एक फर्म ने दिल्ली की 12 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से खरीदारी दिखाकर यह आइटीसी हासिल की।

जब मिला बिना बिल का स्टॉक...

जांच के दौरान मौके पर 58 लाख रुपये का बिना बिल का स्टॉक भी मिला। जिसे टीम ने सीज कर दिया। इसके अलावा फर्म के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध 53 लाख रुपये की आइटीसी ब्लॉक कर दी गई है।

अपर आयुक्त गाजियाबाद जोन प्रथम अजय कुमार गौतम और अपर आयुक्त (एसआइबी) रामकेश्वर के निर्देशन में 31 अक्टूबर को फर्म की जांच की गई। शहीद नगर, नियर अजीत रोड स्थित मैसर्स सर्वश्री अनस इंटरप्राइजेज केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के अंतर्गत पंजीकृत है।

फर्म की ओर से मशीनरी, कटिंग मशीन, पेपर प्रिंटिंग मशीन और आयरन स्क्रैप की खरीद-बिक्री दिखाई गई थी। जांच में सामने आया कि फर्म ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में दिल्ली की 12 बोगस फर्मों से कुल 8.55 करोड़ रुपये की आइटीसी प्राप्त की।

वहीं, वर्ष 2025-26 में 30.51 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई थी। इस दौरान 7.50 करोड़ रुपये की कर देयता का समायोजन बोगस आइटीसी से किया गया। इसके अलावा हरियाणा की दो फर्मों पिंकी साल्यूशन एलएलपी और पिंकी साल्यूशन को भी भारी मात्रा में बिक्री दिखाकर आइटीसी पास आन की गई।

जांच टीम को कुछ पुरानी प्रिंटिंग मशीनें मिलीं, लेकिन फर्म के घोषित कारोबार के संबंध में कोई अधिकृत प्रतिनिधि संतोषजनक दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के पास वास्तविक कारोबार के अनुरूप मशीनरी और उत्पादन की व्यवस्था नहीं थी। मौके पर बिना बिल का 58 लाख रुपये का स्टाक मिलने पर टीम ने उसे सीज कर दिया।

3.94 करोड़ रुपये के ई-वे बिल में मिली अनियमितता

जांच में वर्ष 2026-27 के रिटर्न में 81.33 लाख रुपये की अवैध आइटीसी लेने का भी मामला सामने आया। वहीं, वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक कुल 3.94 करोड़ रुपये के ई-वे बिल में अनियमितता मिली।

जांच में पाया गया कि राजस्थान और दिल्ली की फर्मों से दिखाई गई खरीद से संबंधित वाहनों का मूवमेंट दूसरे मार्गों पर था। इसके बाद फर्म के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध 53 लाख रुपये की आइटीसी को ब्लाक कर दिया गया।

विभाग ने फर्म स्वामियों को आगे की जांच के लिए कार्यालय में उपस्थित होने के समन जारी किए हैं। जांच के दौरान संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, डिप्टी कमिश्नर विमल कुमार दुबे और राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी एवं शिव हरे शामिल रहे।

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