बिजली बिल के विवाद में गाजियाबाद की बुलंद हाइट्स सोसायटी की बत्ती गुल, 1000 रेजिडेंट्स ने DM से मांगी मदद
गाजियाबाद की बुलंद हाइट्स सोसायटी में बिजली बिल विवाद के चलते बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इससे 800-1000 निवासी अंधेरे ...और पढ़ें

क्राॅसिंग रिपब्लिक स्थित बुलंद हाइट्स सोसायटी में बिजली भुगतान को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को और गहरा गया। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
बुलंद हाइट्स सोसायटी में बिजली बिल विवाद के कारण आपूर्ति बाधित।
करीब 800-1000 निवासी अंधेरे में, वैकल्पिक डीजी भी बंद हुआ।
निवासियों ने पुलिस में शिकायत की, जिलाधिकारी से हस्तक्षेप मांगा।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। क्राॅसिंग रिपब्लिक स्थित बुलंद हाइट्स सोसायटी में बिजली भुगतान को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को और गहरा गया।
क्राॅसिंग्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) की ओर से शाम करीब पांच बजे बिजली आपूर्ति बाधित किए जाने के बाद सोसायटी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चल रहा डीजी भी रात करीब साढ़े आठ बजे बंद हो गया।
इसके बाद पूरी सोसायटी में अंधेरा छा गया। करीब 800 से 1000 निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नाराज वरिष्ठ निवासी और एओए पदाधिकारी मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंचे और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बिजली आपूर्ति बाधित करना उचित नहीं
एओए अध्यक्ष हरीश शर्मा के मुताबिक, सोसायटी में वर्ष 2021 से पीएमवी फैसिलिटी मैनेजमेंट की ओर से मेंटेनेंस का काम किया जा रहा था। निवासियों से बिजली शुल्क की राशि प्रीपेड मीटर व्यवस्था के माध्यम से ली जाती रही।
एओए का दावा है कि 31 अगस्त तक की देय राशि निवासियों द्वारा पहले ही जमा कराई जा चुकी है। ऐसे में उसी अवधि की कथित बकाया राशि को लेकर बिजली आपूर्ति बाधित करना उचित नहीं है।
एओए ने 17 जुलाई को पीएमवी को टर्मिनेशन लेटर दिया
एओए अध्यक्ष के मुताबिक, एओए ने 17 जुलाई को पीएमवी को टर्मिनेशन लेटर देकर 31 अगस्त से उसका कार्य समाप्त कर दिया था। इसकी सूचना सीआईपीएल को भी दे दी गई थी।
इसके बाद सीआईपीएल की ओर से करीब 15.30 लाख रुपये की बकाया राशि बताए जाने पर एओए ने स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि का भुगतान निवासी पीएमवी को कर चुके हैं। पुराने भुगतान का हिसाब सीआईपीएल और पीएमवी के बीच होना चाहिए।
जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की
एओए का आरोप है कि पीएमवी को निवासियों से प्राप्त राशि और सीआईपीएल को किए जाने वाले भुगतान का विवरण लगातार मांगा गया, लेकिन पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। विवाद बढ़ने के बाद बिजली कटौती का सीधा असर निवासियों पर पड़ा। इससे पहले एओए ने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।
