कभी भी गिर सकती हैं गाजियाबाद की 129 इमारतें, दिल्ली में सत्य निकेतन हादसे के बाद भी सो रहा नगर निगम
गाजियाबाद में नगर निगम ने 129 इमारतों को असुरक्षित घोषित किया है, जिनमें लोग अभी भी रह रहे हैं। दिल्ली ...और पढ़ें

मधुबन बापूधाम स्थित जर्जर ईमारत की छत पर उगे पेड़। जागरण
HighLights
नगर निगम ने गाजियाबाद की 129 इमारतें असुरक्षित घोषित कीं
इन जर्जर इमारतों में लोग अभी भी रह रहे हैं, खतरा बरकरार
स्टाफ की कमी से असुरक्षित भवनों पर कार्रवाई में देरी हो रही
हसीन शाह, गाजियाबाद। दिल्ली में इमारत गिरने के हादसे के बाद भले ही जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हों, लेकिन गाजियाबाद में नगर निगम की कार्रवाई अभी नोटिस तक सीमित दिखाई दे रही है।
नगर निगम क्षेत्र में 129 ऐसी इमारतें हैं, जिन्हें निगम असुरक्षित घोषित कर चुका है। इन भवनों में आज भी लोग रह रहे हैं। कई इमारतों की हालत ऐसी है कि वर्षा या किसी अन्य वजह से इनके ढहने का खतरा बना हुआ है। नगर निगम हादसे का इंतजार कर रहा है।
शहर में 129 इमारतें असुरक्षित
नगर निगम क्षेत्र में करीब चार लाख मकान हैं। हर साल वर्षा के दौरान पुराने और जर्जर भवनों को लेकर खतरा बढ़ जाता है। किसी भवन के गिरने या उसकी दीवार-छत का हिस्सा ढहने के बाद निगम की टीमें सक्रिय होती हैं।
निगम के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार चहारदीवारी के भीतर वाले पुराने शहर के अलावा प्रताप विहार, विजय नगर, नंदग्राम सहित अन्य क्षेत्र में 129 इमारतों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।
हालांकि यह आंकड़ा शहर में मौजूद सभी जर्जर भवनों की वास्तविक तस्वीर नहीं बताता। निगम के पास असुरक्षित भवनों का कोई ताजा सर्वे नहीं है। अनुमान है कि शहर में 200 से अधिक इमारतें ऐसी हो सकती हैं, जिनमें लोगों की जान जोखिम में है। इनमें कुछ भवन नगर निगम मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर भी बताए जा रहे हैं।
चार दिन में एक भी मकान नहीं किया चिह्नित
चार दिन पहले नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने पुराने और जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी को ऐसे भवनों की पहचान कर रिपोर्ट तैयार करनी है, जिनके ढहने की आशंका है।
चार दिन बीतने के बाद भी कमेटी की ओर से एक भी नए जर्जर भवन को चिह्नित नहीं किया गया है। जबकि शहर के कई हिस्सों में जर्जर मकान आम लोगों को आसानी से दिखाई दे रहे हैं।
नोटिस के बाद क्यों रुक जाती है कार्रवाई
असुरक्षित भवन मिलने के बाद निगम की ओर से भवन मालिक को नोटिस दिया जाता है। लेकिन नोटिस के बाद भवन को खाली कराने, उसे सुरक्षित करने या नियमों के तहत ध्वस्त कराने की प्रक्रिया कई मामलों में आगे नहीं बढ़ पाती।
यदि भवन पहले ही असुरक्षित घोषित हो चुका है तो उसमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगला कदम कब उठाया जाएगा? सवाल यह है कि यदि किसी असुरक्षित भवन के गिरने से जान-माल का नुकसान होता है तो केवल पहले नोटिस दिए जाने की बात कहकर जिम्मेदारी से बचा जा सकेगा या नहीं।
शहर में 500 से अधिक पीजी
किसी विभाग के पास शहर में संचालित पीजी की आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। विभिन्न व्यावसायिक वेबसाइटों पर उपलब्ध लिस्टिंग के आधार पर शहर में 500 से अधिक पीजी होने का अनुमान है।
इनमें कई पीजी पुराने आवासीय भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे भवनों में सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकास और अग्निशमन व्यवस्था की स्थिति भी जांच का विषय है। कई पीजी भवनों में दमकल विभाग की एनओसी नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
स्टाफ की कमी बन रही बाधा
नगर निगम के निर्माण विभाग के अनुसार असुरक्षित और जर्जर भवनों का सर्वे करने के साथ उनका निस्तारण कराने की जिम्मेदारी विभाग की है। विभाग में पर्याप्त कर्मचारियों की कमी है।
इसी वजह से बड़े क्षेत्र में एक साथ सर्वे और कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है। अब निगम पार्षदों और आरडब्ल्यूए से जर्जर भवनों की जानकारी लेकर अभियान को गति देने की तैयारी कर रहा है।
निगम अब इस अभियान में पार्षदों और आरडब्ल्यूए का सहयोग लेने की बात कह रहा है। स्थानीय लोगों के माध्यम से जर्जर भवनों की जानकारी जुटाकर उनका निरीक्षण कराया जाएगा।
निर्माण विभाग में स्टाफ की स्थिति
| पद | तैनात | जरूरत |
|---|---|---|
| जेई | 07 | 22 |
| एई | 06 | 12 |
| एक्सईएन | 01 | 05 |
| एसई | 00 | 02 |
नगर निगम पूर्व में 18 असुरक्षित इमारतों को ध्वस्त कर चुका है। जल्द ही असुरक्षित अन्य मकानों को चिह्नित करने काम शुरू किया जाएगा। पूर्व में 129 सुरक्षित इमारतों के मालिक को नोटिस दिया था।
- एनके चौधरी, मुख्य अभियंता, नगर निगम।
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