कॉमन एरिया पर कब्जा और कई अवैध ढांचे... गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रींस सोसायटी में GDA की पोल खोलती RTI रिपोर्ट
गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रींस सोसायटी में जीडीए ने आरटीई और आइजीआरएस के जवाब में अवैध निर्माण की बात स्वीकार की ...और पढ़ें
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मोहन नगर की गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में हुआ अवैध निर्माण। जागरण
HighLights
जीडीए ने गुलमोहर ग्रींस में अवैध निर्माण स्वीकार किया।
बिल्डर ने कॉमन एरिया बेचकर अवैध निर्माण किया।
निवासियों ने जीडीए-बिल्डर साठगांठ का आरोप लगाया।
जितेंद्र सिंह, साहिबाबाद (गाजियाबाद)। सूचना का अधिकार (आरटीई) और आइजीआरएस के जवाब में जीडीए ने माना कि मोहननगर की गुलमोहर ग्रींस सोसायटी में अवैध निर्माण किया गया। यहां तक की कामन एरिया को बेचकर भी उस पर अवैध निर्माण करा दिया।
सोसायटी में आरडब्ल्यूए के संस्थापक और पहली बार हाई कोर्ट में अर्जी लगाने वाले निश्चल त्यागी ने बताया कि पहली बार उन्होंने वर्ष 2012 में जीडीए में शिकायत की। एक साल तक शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई न होने पर वर्ष 2013 में आरटीआइ डाली। इस पर जीडीए ने घुमा फिराकर जवाब दिया।
वर्ष 2015 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद जीडीए के अधिकारियों ने लोगों के साथ बैठक की। इस दौरान पाया गया कि बिना प्रमाण पत्र के छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बना रहा था, जो नियमों के खिलाफ था।
बताया कि कामन एरिया और ग्रीन एरिया को भी बेचने का मामला इसी दौरान सामने आया था। साथ ही जीडीए ने इसे स्वीकृति के विपरीत माना। सभी टावर आठ मंजिल तक स्वीकृत थे, लेकिन ऊपर दो तल और बना लिए।

समूह आवास का निर्माण कराया
वर्ष 2022 में जीडीए ने स्थानीय निवासी मोहित अग्रवाल द्वारा डाली गई आइजीआरएस पर जवाब दिया कि बिल्डर की ओर से वर्ष 2011-12 से वर्ष 2014 तक समूह आवास का निर्माण कराया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि बिल्डर ने कामन एरिया भूतल पर रहने वाले निवासियों को बेच दिया है और उस पर अवैध निर्माण कर लिया गया है। इसके बाद जीडीए की ओर से कुछ मकानों के बाहर का अवैध निर्माण ध्वस्त भी किया गया था।
कामन एरिया में अभी भी अवैध निर्माण
निश्चल त्यागी का कहना है कि कामन एरिया में अभी भी अवैध निर्माण है। कई टावरों के बाहर लोगों ने चारदीवारी बनाकर अवैध निर्माण कर रखा है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
बिल्डर साठगांठ कर करता गया अवैध निर्माण
निवासियों का कहना है कि बिल्डर जीडीए से साठगांठ कर अवैध निर्माण करता रहा। वर्ष 2015 में एओए बदल गई। नई एओए गठित हुई, लेकिन बिल्डर का अवैध निर्माण जारी रहा। जीडीए की ओर से प्रभावी कार्रवाई न करने के कारण यह खेल चलता रहा।
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