दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे हादसा: पुलिस ने जिसे दी क्लीन चिट, कोर्ट ने उसे माना 'क्रिमिनल लापरवाही', फिर होगी जांच
पुलिस ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में दोपहिया वाहन चालक को दोषी ठहराते हुए टैंकर चालक को क्लीन चिट ...और पढ़ें
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पुलिस की थ्योरी पर कोर्ट की फटकार
HighLights
पुलिस ने डीएमई हादसे में टैंकर चालक को क्लीन चिट दी।
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट खारिज कर दोबारा जांच के आदेश दिए।
बिना रिफ्लेक्टर खड़े टैंकर को कोर्ट ने आपराधिक लापरवाही माना।
हसीन शाह, गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर दोपहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध का हवाला देकर पुलिस ने टैंकर चालक को क्लीन चिट दे दी थी। हादसे के लिए बाइक सवार को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। जबकि टैंकर भी नियमों का उल्लंघन कर डीएमई पर खड़ा किया गया था।
अदालत ने पुलिस की इस रिपोर्ट को खारिज कर थानाध्यक्ष मसूरी को दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-पांच की न्यायाधीश प्रीति भूषण ने कहा कि एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों के चलने पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि भारी वाहन सड़क पर खतरनाक तरीके से खड़ा किया जा सकता है।
साल 2022 का है पूरा मामला
मामला 7 अक्टूबर 2022 का है। दोपहर करीब 12:30 बजे वेब सिटी के सामने एक्सप्रेसवे पर एक टैंकर खराब हालत में खड़ा था। बाइक उससे टकरा गई। हादसे में बाइक सवार इंद्रदीप सोनी गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चले गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों मुकेश कुमार और नौशाद ने पुलिस को बताया था कि टैंकर असुरक्षित तरीके से खड़ा था। ड्यूटी पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी और एनएचएआइ एंबुलेंस चालक दीपक त्यागी के बयान में भी टैंकर के बिना रिफ्लेक्टर या सुरक्षा संकेतक के खड़े होने की बात सामने आई थी। पुलिस ने बाइक सवार को दोषी ठहराते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।
मजिस्ट्रेट अदालत ने 10 दिसंबर 2024 को यह रिपोर्ट स्वीकार की थी। शिकायतकर्ता कुलदीप सोनी ने इसके खिलाफ सत्र न्यायालय में याचिका दायर की। सत्र न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को पहले का आदेश निरस्त कर मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 को मजिस्ट्रेट अदालत ने अंतिम रिपोर्ट खारिज कर दोबारा जांच का आदेश दिया।
मसूरी पुलिस ने की दोषपूर्ण ढंग से जांच
अदालत ने माना कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्ग पर बिना किसी रिफ्लेक्टर, इंडिकेटर या सुरक्षा चेतावनी के टैंकर खड़ा करना गंभीर आपराधिक लापरवाही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बावजूद किसी भारी वाहन चालक को मुख्य सड़क पर खतरनाक ढंग से वाहन खड़ा करने का अधिकार नहीं मिल जाता। पुलिस ने दोषपूर्ण ढंग से बिना विवेचना किए ही अंतिम आख्या रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी।
पुलिस की जांच में चूक
- टैंकर में क्या खराबी थी और वह अचानक खराब हुआ था या पहले से चलने की स्थिति में नहीं था, इसकी पड़ताल नहीं की गई।
- टैंकर की तकनीकी जांच नहीं कराई गई।
- फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच नहीं हुई।
- गवाहों के बयान और अहम तथ्यों की ठीक से पड़ताल किए बिना अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
