उम्र 80 साल, हौसला जवान; गाजियाबाद की कमलेश देवी ने सीखे अ, आ और गिनती, अब दी साक्षरता परीक्षा
गाजियाबाद की 80 वर्षीय कमलेश देवी ने नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पढ़ना-लिखना सीखा और मूलभूत साक्षरता परीक्षा दी। ...और पढ़ें

प्राथमिक विद्यालय जलालाबाद-1 में नवभारत साक्षरता मिशन के अंतर्गत साक्षरता परीक्षा देने पहुंची 80 वर्षीय कमलेश देवी।
HighLights
80 वर्षीय कमलेश देवी ने नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से जुड़कर पढ़ना सीखा।
गाजियाबाद में मूलभूत साक्षरता परीक्षा में उन्होंने सफलतापूर्वक भाग लिया।
कमलेश देवी ने दिखाया कि ज्ञान प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती।
दीपा शर्मा, गाजियाबाद। उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम को जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं, उसी उम्र में जलालाबाद-1 क्षेत्र की 80 वर्षीय कमलेश देवी ने किताब और कापी थामकर पढ़ना सीखने की ठानी।
कभी अक्षरों को पहचानने में परेशानी होती थी तो रोजमर्रा के छोटे-मोटे हिसाब के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से जुड़ने का मौका मिला तो उन्होंने उम्र की परवाह किए बिना अपना नामांकन कराया। मेहनत से अ, आ और गिनती सीखने के बाद रविवार को उन्होंने मूलभूत साक्षरता परीक्षा भी दी।
कमलेश देवी जिले में इस वर्ष नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से जुड़ने वाली सबसे अधिक उम्र की परीक्षार्थियों में शामिल हैं। उनका कहना है कि पढ़ना-लिखना सीखने की इच्छा पहले भी थी, लेकिन इसके लिए अवसर नहीं मिल पाया।
कार्यक्रम के माध्यम से जब आसपास के लोगों को पढ़ने के लिए जोड़ा जा रहा था तो उन्होंने भी सीखने का निर्णय लिया। इसके बाद नियमित रूप से साक्षरता गतिविधियों में शामिल होकर अक्षर पहचानने, शब्द पढ़ने और सामान्य गणना का अभ्यास किया।
172 केंद्रों पर हुई परीक्षा
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को जिले के 172 परीक्षा केंद्रों पर प्रथम मूलभूत साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई। इसमें कुल 1821 असाक्षर वयस्कों ने प्रतिभाग किया। परीक्षा में शामिल महिला और पुरुष परीक्षार्थियों ने पढ़ने, लिखने तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली सामान्य गणना से संबंधित अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।
परीक्षा का उद्देश्य कार्यक्रम के माध्यम से साक्षरता का ज्ञान प्राप्त कर रहे वयस्कों के सीखने के स्तर का आकलन करना है। परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के बैठने, परीक्षा सामग्री और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने परीक्षा के संचालन में सहयोग किया।
पढ़ना सीखने के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे वयस्कों को साक्षर बनाना है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से नहीं जुड़ सके। कार्यक्रम के तहत उन्हें पढ़ने-लिखने के साथ दैनिक जीवन में जरूरी गणना और उपयोगी जानकारी समझने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
80 वर्षीय कमलेश देवी जैसी परीक्षार्थियों की भागीदारी यह बताती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। परीक्षा में शामिल होना उनके लिए केवल ज्ञान परखने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने का भी माध्यम बना।
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