उम्र 59 साल, हौसला जवान, पूर्व सैनिक शिवानंद ने लद्दाख में किया कमाल
पूर्व सैनिक शिवानंद डंगवाल ने 59 साल की उम्र में लद्दाख मैराथन-2026 में दो लंबी दूरी की दौड़ में कांस्य ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, देहरादून। उम्र 59 साल, लेकिन हौसला किसी युवा धावक जैसा। टिहरी गढ़वाल के पूर्व सैनिक सूबेदार (आनरेरी कैप्टन) शिवानंद डंगवाल ने लद्दाख मैराथन-2026 में दो अलग-अलग लंबी दूरी की दौड़ में तीसरा स्थान हासिल कर उत्तराखंड का मान बढ़ाया।
12वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत्त डंगवाल ने 122 किलोमीटर सिल्क रूट अल्ट्रा और 42.195 किलोमीटर मैराथन में कांस्य पदक जीते।
लद्दाख की ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच लंबी दूरी की दौड़ धावकों के लिए बड़ी चुनौती होती है।
ऐसे में दोनों स्पर्धाओं में तीसरा स्थान हासिल करना डंगवाल की फिटनेस, धैर्य और मानसिक मजबूती को दिखाता है। खास बात यह है कि उन्होंने एक ही आयोजन में अलग-अलग दूरी की दोनों दौड़ों में अपनी क्षमता साबित की। सेना में सेवा के दौरान सीखा अनुशासन और फिटनेस डंगवाल ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाए रखा।
वर्दी उतरने के बाद उन्होंने दौड़ को अपना नया लक्ष्य बनाया और लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं के लिए लगातार अभ्यास किया। लद्दाख में मिली सफलता उनकी इसी मेहनत और निरंतरता का परिणाम है। डंगवाल की उपलब्धि को उस सैनिक भावना से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें सेना से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन सैनिक का जज्बा नहीं।
भारतीय सेना ने उनके साहस, अनुशासन और उत्कृष्टता के प्रति समर्पण की सराहना की है। लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी के अनुसार टिहरी गढ़वाल के रहने वाले डंगवाल की यह उपलब्धि युवाओं के साथ पूर्व सैनिकों के लिए भी प्रेरणा है।
उन्होंने दिखाया कि उम्र बढ़ने के साथ चुनौतियां जरूर बढ़ती हैं, लेकिन लक्ष्य हासिल करने की इच्छा और मेहनत बनी रहे तो नई उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। लद्दाख की कठिन राह पर दो दौड़ों में कांस्य जीतने वाले डंगवाल ने साबित किया कि उम्र शरीर की सीमा तय कर सकती है, हौसले की नहीं।
उनकी कहानी उन लोगों के लिए संदेश है जो किसी पड़ाव पर खुद को रोक लेते हैं। डंगवाल ने 59 की उम्र में भी कदम बढ़ाए और दो बार तीसरे स्थान तक पहुंचकर बताया कि नई शुरुआत के लिए कोई उम्र तय नहीं होती। गढ़वाल के टिहरी क्षेत्र के एक दूरस्थ इलाके से आने वाले सूबेदार शिवानंद ने अप्रैल 1986 में रेजिमेंट में भर्ती होकर अगस्त 2014 में सेना से सेवानिवृत्ति ली।
उनकी अब तक की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं
लेह मैराथन – 42 किमी | 2023
खारदुंग ला चैलेंज – 72 किमी | 2024
सिल्क रूट अल्ट्रा – 122 किमी | 2025
सिल्क रूट अल्ट्रा – 122 किमी | 2026
मैराथन – 42.195 किमी | 2026
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