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अव्यवस्था के खिलाफ जेन अल्फा के विरोध के बीच फतेहपुर में DM की 'पिक्चर योर फ्यूचर' पहल, डॉक्टर-इंजीनियर बनने का बुन रहे सपना

Published: Fri, 21 Aug 2026 08:58 PM (GMT+05:30)

फतेहपुर में डीएम निधि गुप्ता वत्स ने 'पिक्चर योर फ्यूचर' पहल शुरू की है, जिससे जेन अल्फा के छात्र-छात्राएं डॉक्टर, ...और पढ़ें

HighLights

  1. फतेहपुर में डाक्टर, इंजीनियर, विज्ञानी व अफसर बनने की प्रेरणा संग बुन रहे भविष्य का सपना

  2. डीएम की नई पहल, कहा- जब सोच अच्छी होगी तभी गांव, जिला, प्रदेश व देश भी बेहतर बनेगा

  3. एआई तकनीक से सपनों के पेशे की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं

विनोद मिश्र, फतेहपुर। जब देश भर में स्कूलों में कमियां निकालकर जेन अल्फा यानी कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राएं विरोध के सुर मुखर कर रहे हैं, तब फतेहपुर में यही विद्यार्थी नई सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यहां जेन अल्फा को बेडरूम से क्लासरूम तक ‘पिक्चर योर फ्यूचर’ की नई पहल से जोड़ा गया है। यह संभव हुआ है डीएम निधि गुप्ता वत्स के नवाचार से, जिसमें बेहतर समाज के निर्माण व सरकारी स्कूलों में सफलता दर को बढ़ाने के लिए डीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों व शिक्षकों के साथ लिया है।

इन्हें छात्र-छात्राओं को डाक्टर, इंजीनियर, विज्ञानी व अफसर बनने की प्रेरणा देने के साथ उनके भविष्य का सपना बुनने में मददगार बनाया गया है। डीएम का कहना है कि जब सोच अच्छी होगी तभी गांव, जिला, प्रदेश व देश भी बेहतर बनेगा। सर्वोदय इंटर कालेज किशनपुर में बीते जुलाई माह में मूलभूत समस्याओं को लेकर एक हजार छात्र-छात्राएं सड़क पर उतर आए थे। उन्हें समझाने के साथ व्यवस्थाएं 48 घंटे में ठीक कर दी गई थीं। इसके बाद डीएम ने ‘पिक्चर योर फ्यूचर’ को शिक्षा के नवाचार के रूप में 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों, 2123 परिषदीय, 22 राजकीय व 72 सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में इसे लागू किया गया है।

इसके तहत विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने को स्कूल में शिक्षक प्रेरित कर रहे हैं, ताकि उनमें भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सके। उन्हें अपने सपनों व करियर की संभावनाओं से जोड़ने, शिक्षा के प्रति उनकी रुचि को और मजबूत करने का काम होगा। इसके तहत स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों की रुचि अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीक से तैयार की गई तस्वीरें उनके सपनों के विभिन्न पेशों व डाक्टर, आइएएस या आइपीएस अधिकारी, शिक्षक, इंजीनियर, विज्ञानी, पायलट, सैनिक एवं अन्य क्षेत्रों में नौकरी की भूमिका के साथ प्रदर्शित की जा रही है।

एक-एक फोटो फ्रेम बच्चों को दिया जा रहा, जो बेडरूम में लगाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को यह अनुभव कराना है कि आज का विद्यार्थी ही कल अपने सपनों के मुकाम पर पहुंच सकता है। वर्तमान समय करियर बनाने का है, न कि आंदोलनों या फिजूल की बातों में समय गंवाने का।

नवाचार की मुख्य बातें

  • बच्चे को उसकी रुचि के अनुसार कुछ भी बनने के लिए प्रेरणा देना
  • चुने गए पद को किस तरह पढ़ाई करके पाया जा सकता है, ये बताना
  • इंटरनेट प्लेटफार्म में रुचिकर पद के लिए जरूरी तैयारी, प्रेरक कहानियां दिखाना व सुनाना
  • हर दिन कक्षा में बच्चों को उनके सपने की याद दिलाना, ताकि मानस पटल में लक्ष्य स्पष्ट रहे
  • स्कूल छोड़कर उच्च कक्षाओं में जाने पर भी शिक्षक अपने विद्यार्थी का दूरभाष पर मार्गदर्शन करें
  • सरकारी स्कूलों में अफसरों की ड्यूटी भी लगी कि वह कक्षाओं में जाएं और बच्चों से करें संवाद
 
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पिक्चर योर फ्यूचर अभियान को लागू करने से राजकीय व सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे बच्चे अपना लक्ष्य अभी से तय कर सकेंगे कि उन्हें भविष्य में क्या बनना है।
-राकेश कुमार, डीआइओएस

 

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10 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में पिक्चर योर फ्यूचर लागू करन के साथ परिषदीय स्कूलों में भी इसे शुरू किया जा रहा है। शिक्षकों के प्रयास से इसी माह के अंत तक सभी 2123 स्कूलों में अभियान आरंभ कर देंगे।
प्रिंसी मौर्य, बीएसए

 

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करत-करत अभ्यास से जड़मति होत सुजान... वृंद-सतसई के इस दोहे को साकार करना है। जब किसी भी लक्ष्य को बार-बार देखने संग उसी के बारे में सोचा जाए तो वह पूरा करने का जुनून जगाता है। वही जुनून सरकारी स्कूलों के बच्चों में जगाने का प्रयास इस पहल से किया जा रहा है। पहले संसाधन कम थे, लेकिन अब बहुत सुधार के साथ संसाधन जुटाए गए हैं। बच्चों में ऊर्जा है, पहली कक्षा से ही उनका लक्ष्य तय हो जाए तो वह सफलता की ओर बढ़ेंगे।
-निधि गुप्ता वत्स, जिलाधिकारी फतेहपुर

 

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