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इटावा में दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग पर 866 करोड़ से बन रहा 9.7 किमी लंबा फ्लाईओवर, मिलेगी ट्रेनों को रफ्तार

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:35 PM (IST)

इटावा में दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर 866 करोड़ रुपये की लागत से 9.711 किमी लंबा रेल फ्लाईओवर बनाया जा रहा है, ...और पढ़ें

ग्राम कांधनी के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर। जागरण

ग्राम कांधनी के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर। जागरण 

HighLights

  1. इटावा में 866 करोड़ से 9.7 किमी लंबा रेल फ्लाईओवर

  2. मार्च 2027 तक पूरा होगा, बढ़ाएगा ट्रेनों की रफ्तार

  3. तीन ब्रांच लाइनों को मिलेगी क्रासिंग और ठहराव से मुक्ति

राजीव शर्मा, इटावा। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेनों के परिचालन को गति देने के लिए इटावा में 866.06 करोड़ रुपये की लागत से 9.711 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर राहतपुर गांव के पास बनाया जा रहा है। यह फ्लाईओवर इटावा-मैनपुरी और इटावा-भिंड व इटावा आगरा ब्रांच रेल से ट्रेनों को बार-बार होने वाली क्रासिंग और डिटेंशन से राहत देगा।

परियोजना के पूरा होने के बाद भिंड, मैनपुरी व आगरा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुख्य दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग की अप और डाउन मेन लाइन को सतह पर पार करने की बाध्यता समाप्त हो जाएगी। रेलवे ने इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फ्लाईओवर बनने से ग्वालियर-आगरा की ओर से इटावा आने वाली और मैनपुरी की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए अलग मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे ट्रेन परिचालन की गति और समय पालन में सुधार होगा।

अभी ट्रेनों को 15 मिनट तक क्रासिंग में रूकना पड़ता

इससे ग्वालियर, आगरा व मैनपुरी की ब्रांच लाइन पर जाने वाली एक दर्जन यात्री व एक दर्जन मालगाड़ी सीधे निकल जाएंगी। अभी ब्रांच लाइन की ट्रेनों को 15 मिनट तक क्रासिंग पर रुकना पड़ता है। दिल्ली हावड़ा रूट खाली होने पर इन ट्रेनों को इटावा जंक्शन पर लाया जाता है। दो दर्जन ट्रेनों के करीब छह घंटे के समय की बचत हाेगी।

इटावा टूंडला सेक्शन के बीच शुरू हुआ था काम

दस वर्ष पहले वर्ष 2017 में शुरु हुए नए रेलवे फ्लाईओवर कनेक्टविटी कार्य का इटावा टूंडला सेक्शन के बीच शुरु हुआ था। इसका उद्देश्य दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर 2015-17 में इटावा जंक्शन से वाह-आगरा एवं भिंड-ग्वालियर और मैनपुरी ब्रांच रेल लाइन की शुरुआत होने के बाद हुई थी। इटावा फ्लाईओवर का मुख्य उद्देश्य तीनों ब्रांच लाइनों के बीच लिंक उपलब्ध कराना है।

ट्रेनों के लिए अलग मार्ग उपलब्ध होगा

वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग की व्यस्त मेन लाइनों से राहतपुर क्रासिंग से गुजरना पड़ता है। इससे कई बार ट्रेनों को क्रासिंग मिलने तक रोकना पड़ता है। फ्लाईओवर बनने के बाद ग्वालियर-आगरा की ओर से इटावा आने वाली और मैनपुरी की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए अलग मार्ग उपलब्ध होगा।

इटावा व जसवंतनगर के आठ गांव से गुजरेगा फ्लाईओवर

फ्लाईओवर का नक्शा ऐसा बनाया जा रहा है कि यह ग्वालियर-भिड़ एवं बाह-आगरा व मैनपुरी से होकर आने वाली ट्रेनों को बिना दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग क्रास किए सीधे जंक्शन पर पहुंचेगा। यह ओवर ब्रिज इटावा व जसवंतनगर तहसील के आठ गांवों में फैला होगा। जिसमें इटावा तहसील के कांधनी, आलमपुर हौज, बुलाकीपुर लुहन्ना, सराय ऐसर, विचारपुरा, डूंगरी, हरसाैली से होकर जसवंतनगर तहसीत के ग्राम सैदपुरा शामिल हैं।

फ्लाईओवर जमीन का 89.28 प्रतिशत अधिग्रहण पूरा

रेल फ्लाईओवर के निर्माण की प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। परियोजना के लिए कुल 2 लाख 10 हजार 170 वर्गमीटर भूमि की जरूरत है, जिसमें से 1 लाख 87 हजार 657 वर्गमीटर यानी 89.28 प्रतिशत भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। भूमि के एवज में अब तक 65.89 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। रेलवे की ओर से 75 करोड़ रुपये दो किस्तों में जमा कराए गए हैं। परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार आठ गांवों की भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शामिल है।

जानें कहां कितनी जमीन अधिग्रहित

इनमें कांधनी में 30 हजार 63 वर्गमीटर में से 24 हजार 145 वर्गमीटर (80.31 प्रतिशत), बुलाकीपुर लुहन्ना में 3 हजार 618 में से 95 वर्गमीटर (2.63 प्रतिशत), सैदपुर में 3 हजार 741 में से 3 हजार 306 वर्गमीटर (88.37 प्रतिशत) भूमि अधिग्रहीत हुई है। इसी तरह विचारपुरा में 25 हजार 69 में से 21 हजार 876 वर्गमीटर (87.76), डूंगरी में 81 हजार 273 में से 74 हजार 18 वर्गमीटर (91.07), आलमपुर हाउज में 22 हजार 672 में से 21 हजार 311 वर्गमीटर (93.99), हरसौली में 15 हजार 414 में से 15 हजार 108 वर्गमीटर (98.01 प्रतिशत) और सराय एशर में 28 हजार 320 में से 27 हजार 798 वर्गमीटर (98.16) भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है।

रेलवे के लिए इस परियोजना का सबसे बड़ा महत्व यही है कि ट्रेनों को मुख्य लाइन पर रास्ता देने के लिए बार-बार रोकने की जरूरत कम होगी। इसका फायदा केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि मालगाड़ियों के परिचालन और पूरे दिल्ली-हावड़ा रेलखंड की क्षमता को भी मिलेगा। यानी इटावा का यह फ्लाईओवर केवल एक रेल पुल नहीं, बल्कि तीन महत्वपूर्ण रेल दिशाओं को जोड़ने वाला ऐसा वैकल्पिक मार्ग होगा, जो आने वाले समय में ट्रेनों की रफ्तार, समयपालनता और परिचालन क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
अमित कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी प्रयागराज मंडल

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