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यूपी में बारिश से फसल हुई खराब: 72 घंंटे में दें सूचना, नोट करें टोल फ्री नंबर

Published: Sun, 27 Sep 2026 11:15 AM (IST)

एटा जिले में लगातार वर्षा से फसलों को हुए नुकसान की सूचना किसान 72 घंटे के भीतर दे सकते हैं।

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. वर्षा से फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर अनिवार्य।

  2. यूनिवर्सल सोम्पो टोल फ्री नंबर 14447 पर क्षति बताएं।

  3. धान, मक्का, बाजरा के बीमित किसान तुरंत जानकारी दें।

जागरण संवाददाता, एटा। जिले में लगातार हो रही वर्षा के बीच फसलों को हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दे सकते हैं। उप कृषि निदेशक ने धान, मक्का और बाजरा की अधिसूचित फसलों का बीमा कराने वाले ऋणी और गैर-ऋणी किसानों से समय रहते क्षति की जानकारी दर्ज कराने को कहा है। निर्धारित अवधि में सूचना मिलने पर बीमा कंपनी की ओर से फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा।
जिन किसानों ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से फसल बीमा कराया है और वर्षा के कारण उनकी फसल को नुकसान हुआ है, वे कंपनी के टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर सूचना दें।

सूचना देते समय किसान को बीमा और फसल से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना होगा। वर्षा के कारण खेतों में पानी भरने, फसल गिरने अथवा अन्य वजह से नुकसान हुआ है तो किसान निर्धारित समय के अंदर इसकी जानकारी बीमा कंपनी को दें।

सूचना प्राप्त होने के बाद नियमानुसार फसल का सर्वेक्षण और क्षति का आकलन कराया जाएगा। इसके आधार पर फसल बीमा से संबंधित अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

धान, मक्का और बाजरा के बीमित किसानों के लिए फसल बीमा कंपनी ने जारी की अपील

उप कृषि निदेशक सुमित कुमार ने बताया है कि किसानों की सुविधा के लिए बीमा कंपनी ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में प्रतिनिधियों की तैनाती की है। शीतलपुर, सकीट, निधौली कलां, मारहरा, जैथरा, अलीगंज, अवागढ़ और जलेसर विकासखंडों में तैनात ब्लॉक समन्वयकों से भी किसान फसल क्षति की सूचना और बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर जिला मैनेजर और जिला समन्वयक भी किसानों की सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे।

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टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज कराएं क्षति की सूचना

सुमित कुमार ने कहा कि वर्षा से फसल को हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे की निर्धारित अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं, ताकि समय से सर्वेक्षण कराकर क्षति का आकलन और फसल बीमा संबंधी नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

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