148 वर्ष पुरानी इंदूपुर की रामलीला का 15 अक्टूबर से होगा शुभारंभ, देवरिया में 13 दिनों तक बहेगी भक्ति की धारा
देवरिया के गौरीबाजार स्थित छहगांवा इंदूपुर में 148 साल पुरानी रामलीला और ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ 15 अक्टूबर को होगा। ...और पढ़ें

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HighLights
148 वर्ष पुरानी इंदूपुर रामलीला 15 अक्टूबर से शुरू होगी।
श्री श्री 1008 पौहारी महाराज के आगमन से होगा शुभारंभ।
वैष्णव परंपरा में मंचन, देवरिया में भक्ति का संगम।
संवाद सूत्र, गौरीबाजार, (देवरिया)। शरद ऋतु के आगमन के साथ ही विकास खंड गौरीबाजार के छहगांवा इंदूपुर में भक्ति, आस्था और संस्कृति के अनूठे संगम की तैयारी शुरू हो गई है। यहां 148 वर्ष पुरानी रामलीला और ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ 15 अक्टूबर को होगा। कार्तिक मास की पंचमी तिथि पर श्री श्री 1008 पौहारी महाराज के भव्य आगमन के साथ 13 दिवसीय आयोजन शुरू होगा। वर्ष 1878 में शुरू हुई यह परंपरा आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
तमकुही रियासत से जुड़ा है इतिहास
बुजुर्गों के अनुसार, पैकौली आश्रम की संत परंपरा के तीसरे संत श्री श्री 1008 पौहारी जी महाराज ने सबसे पहले तमकुही रियासत में मेले की शुरुआत की थी। तत्कालीन राजा से किसी बात पर अनबन होने के बाद महाराज वहां से चले आए। उस समय छहगांवा के श्रीनेत वंश के संभ्रांत नागरिकों स्व. अमीर सिंह, शिव रतन सिंह और राम प्रताप सिंह सहित अन्य लोगों ने उनसे अपनी पूरी जमात के साथ इंदूपुर के रमणीक जंगल में ठहरने का आग्रह किया।
साधु-संतों के साथ गाय, बैल, हाथी और घोड़ों का समूह भी उनके साथ था। महाराज ने भक्तों का आग्रह स्वीकार कर लिया। इसके बाद इंदूपुर में रामलीला और मेले की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जारी है।
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वैष्णव परंपरा में होता है मंचन
छहगांवा रामलीला समिति की देखरेख में आयोजित होने वाली इस रामलीला की खासियत इसका पारंपरिक स्वरूप है। संस्कृत विद्यालय बैकुंठपुर के छात्र वैष्णव परंपरा के अनुरूप रामलीला का मंचन करते हैं। आयोजन में धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया जाता है।
रामलीला समिति के अध्यक्ष भानुप्रकाश सिंह वीरु के अनुसार, इस गद्दी के महात्माओं की योग साधना और सिद्धियों से जुड़ी अनेक लोक-मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें कामधेनु गाय के कई वर्षों तक लगातार दूध देने और ठाकुर जी का सामान चुराने वाले चोर के अंधे हो जाने जैसी कथाएं शामिल हैं। ये मान्यताएं आज भी लोगों की आस्था का हिस्सा हैं।
