देवरिया की वो बैठक जब नेताओं से भिड़ गई थीं दिव्या मित्तल, वहीं से शुरू हुई 'जनता की आवाज' बनने की कहानी
देवरिया में एक बैठक के दौरान पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का जनप्रतिनिधियों से तबादले को लेकर विवाद हुआ था, जिसके ...और पढ़ें

पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल
HighLights
देवरिया में पूर्व IAS दिव्या मित्तल का जनप्रतिनिधियों से विवाद हुआ।
तबादले को लेकर अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर बहस छिड़ी।
दिव्या मित्तल ने IAS पद से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया।
पवन कुमार मिश्र, देवरिया। कलेक्ट्रेट सभागार में दिशा की बैठक चल रही थी। सामने जिले के सांसद, विधायक व दूसरे जनप्रतिनिधि बैठे थे। एक तबादले को लेकर बात शुरू हुई और देखते ही देखते माहौल बदल गया।
अधिकारी पर दबाव की बात सामने आई तो तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल ने शासनादेश का हवाला दिया। उनका जवाब था कि तबादले के लिए किसी अधिकारी पर जनप्रतिनिधि दबाव नहीं बना सकता। तबादले को लेकर शुरू हुई चर्चा अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के अधिकारों तक पहुंच गई।
बैठक में कही गई यह बात बाहर निकली तो देवरिया से लेकर प्रदेश तक चर्चा का विषय बन गई। उसी समय अलग राह की तैयारी शुरू हो गई थी। करीब सवा साल बाद वही दिव्या मित्तल प्रशासनिक सेवा से बाहर हैं और अब जनता के बीच राजनीतिक पारी शुरू करने का एलान कर चुकी हैं।
प्रकरण तीन जुलाई 2025 का है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक थी। अध्यक्षता सांसद शशांक मणि त्रिपाठी कर रहे थे। बरहज विधायक दीपक मिश्र शाका ने क्षेत्र की सड़क और एक शिक्षिका के वेतन से जुड़ा मामला उठाया।
बात आगे बढ़ी तो तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव व विधायक के बीच मतभेद सामने आ गए। बीएसए ने सहायक लेखाकार के तबादले को लेकर दबाव बनाए जाने की बात कही। मामला बढ़ा तो एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने हस्तक्षेप किया। कोशिश थी कि बात वहीं संभल जाए। लेकिन चर्चा तबादले से निकलकर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के अधिकारों तक पहुंच गई।
इसी दौरान डीएम दिव्या मित्तल ने शासनादेश का हवाला देते हुए जनप्रतिनिधियों से अधिकारियों पर तबादले के लिए दबाव न बनाने की बात कही। उनका यह बयान बैठक खत्म होने के बाद भी चलता रहा।
वीडियो सामने आया व प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई। इसके बाद मामला केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रहा। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी डीएम के बयान पर प्रतिक्रिया सामने आई। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी कहा था कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की बात सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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वक्त बदला, भूमिका बदल गई
तब दिव्या मित्तल के सामने जनप्रतिनिधि थे और वह प्रशासनिक नियमों की सीमा बता रही थीं। अब तस्वीर बदल चुकी है। 30 अगस्त 2026 को उन्होंने आइएएस सेवा से इस्तीफा दिया।
सितंबर में इस्तीफा प्रभावी होने के बाद उनके अगले कदम को लेकर सवाल उठते रहे। उन्होंने मंगलवार को इन सवालों का जवाब देते हुए राजनीति में प्रवेश की घोषणा कर दी।
दिव्या मित्तल ने कहा है कि वह उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी व किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने के बजाय जनता के साथ मिलकर काम करेंगी। उनका कहना है कि जिन लोगों की आवाज सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती, उनकी आवाज बनने की कोशिश करेंगी।
