8 साल तक जेल में लिखी रामायण; अच्छे बर्ताव पर राज्यपाल ने माफ कर दी रिटायर्ड पोस्टमास्टर की उम्रकैद की सजा
कन्नौज जेल में अच्छे बर्ताव और रामायण के सात खंड काव्यों की रचना के चलते राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सेवानिवृत्त ...और पढ़ें

नक्षत्र सहाय दुबे
HighLights
राज्यपाल ने सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर की उम्रकैद की सजा माफ की।
जेल में रहते हुए रामायण के सात खंड काव्यों की रचना की।
अच्छे आचरण और पत्नी की अपील पर मिली रिहाई।
जागरण संवाददाता, कन्नौज। जेल में अच्छे बर्ताव के कारण राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर की उम्रकैद की सजा माफ कर दी। जेल में आठ वर्ष तक कैद के दौरान उन्होंने रामायण के सात खंड काव्यों की भी रचना की है।
छिबरामऊ के कसावा गांव निवासी नक्षत्र सहाय दुबे ने 1972 में राजनीति शास्त्र से एमए किया था। इसके बाद उनकी पोस्टमास्टर के पद पर नौकरी लग गई थी। चार मई 2004 को लोकसभा चुनाव के मतदान के दिन तालग्राम थाना के कबरीगंज निवासी हरीराम यादव की गाेली मारकर हत्या कर दी गई थी।
दिवंगत हरीराम के पिता मेवाराम ने नक्षत्र सहाय दुबे के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई र्थी। सात जून 2017 को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जेल में नक्षत्र सहाय दुबे ने रामायण के कैकेयी चरित्र, भरत चरित्र, सीता वनवास, विभीषण शरणागत, लंका विजय और दशम स्कंद खंड कव्यों की रचना की।
31 मार्च 2023 को सेवानिवृत्त शिक्षिका पत्नी पुष्पा देवी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से रिहाई की अपील की थी। इससे 22 सितंबर 2026 को राज्यपाल नक्षत्र सहाय दुबे के उत्तम आचरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए उम्रकैद की सजा माफ कर दी।
जेल अधीक्षक रवींद्र कुमार ने बताया कि नक्षत्र सहाय दुबे के खिलाफ सिर्फ एक मामला दर्ज था। उनका आचरण अच्छा था। इससे दया याचिका के आधार पर राज्यपाल ने उनकी उम्रकैद की सजा माफ कर दी। फिलहाल अभी वह हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत से बाहर है।
दैनिक जागरण की खबर से आसान हुई राह
जेल में निरीक्षण के दौरान तत्कालीन जज सीपी चौहान ने नक्षत्र सहाय दुबे से वार्ता की। इस दौरान जेल अधिकारियों ने उनकी लिखे खंड काव्यों को दिखाया। काव्यों को पढ़कर जज ने सरकारी खर्च पर कव्यों को प्रकाशित कराने आश्वासन दिया था।
दैनिक जागरण ने तीन जून 2019 को जेल में चमका काव्य का नक्षत्र शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इंटरनेट मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने खबर को प्रचलित कर नक्षत्र सहाय की रिहाई की मांग उठाई थी। नक्षत्र सहाय की पत्नी पुष्पा देवी बताती हैं कि याचिका में उन्होंने दैनिक जागरण की खबर की प्रतिलिपि भी लगाई थी। दैनिक जागरण की खबर से ही रिहाई की राह आसान हुई।
