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चारपाई से लेकर घर के पूरे सामान के साथ चल रहे 308 पहियों वाले 'महाट्रक' के कर्मचारी, हर दिन बन रहा 30 लोगों का खाना

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:57 AM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 09:04 AM (IST)

ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से बलरामपुर चीनी मिल के लिए 200 टन वजनी वैक्यूम बॉयलर लेकर निकला 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रेलर अब वाराणसी पहुंच गया है।

200 टन से अधिक वजनी वाला वेसल (वैक्यूम बायलर) सोमवार को पहुंचा बनारस

200 टन से अधिक वजनी वाला वेसल (वैक्यूम बायलर) सोमवार को पहुंचा बनारस

HighLights

  1. 200 टन वजनी वैक्यूम बॉयलर वाराणसी पहुंचा।

  2. 308 पहियों वाला ट्रेलर, 100 फीट लंबा, 7 मीटर चौड़ा।

  3. सड़क चौड़ीकरण, बिजली तार हटाना, पुल तोड़ना बड़ी चुनौती।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड की लखीमपुर स्थित इकाई के लिए 200 टन वजनी वेसल (वैक्यूम बॉयलर) लेकर निकला 308 पहियों वाला मल्टी-एक्सल ट्रेलर सोमवार को चंदौली से बनारस पहुंच गया।

करीब 100 फीट लंबे और सात मीटर चौड़े इस भीमकाय ट्रेलर का रास्ता बनाने में जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, बिजली, एनएचएआइ समेत कई विभागों की टीमें लगी हैं। वैक्यूम बायलर को ले जाने में दो अतिरिक्त ट्रेलर और दो क्रेन भी साथ चल रहे हैं। काफिले में 64 से अधिक इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी हैं।

जहां सड़क की चौड़ाई कम है, वहां निर्माण तोड़कर सड़क चौड़ी की जा रही है या बगल में वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जा रहा है। बिजली के तार, खंभे, स्ट्रीट लाइट और साइनेज हटाए जा रहे हैं। वाराणसी में डाफी टोल प्लाजा के पास सड़क का हिस्सा तोड़कर रास्ता चौड़ा किया गया है।

ट्रेलर की ऊंचाई और चौड़ाई के कारण फुट ओवरब्रिज भी बाधा बन रहे हैं। वाराणसी में तीन फुट ओवरब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि एक जगह इसका कुछ हिस्सा तोड़ा जाएगा। ट्रेलर के गुजरने के बाद इन्हें दोबारा बनाया जाएगा। रास्ता साफ न होने से ट्रेलर रोज करीब 10 से 12 किलोमीटर ही चल पा रहा है।

पूरी तरह रास्ता साफ मिलने पर यह प्रतिदिन करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय करता है। बलरामपुर चीनी मिल के अधिकारियों के अनुसार बेल्जियम से लाया जा रहा यह वैक्यूम बायलर ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लखीमपुर खीरी की कुम्भी स्थित चीनी मिल तक लाने में 20 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।

अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक का डीजल खर्च हो चुका है। चालक सुरेश चंद्रा के अनुसार, एक दिन चलने पर करीब 200 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। ट्रेलर के साथ चल रहे कर्मचारी शाजिब ने बताया कि यात्रा को चार महीने से अधिक समय हो चुका है।

हर दिन बन रहा 30 लोगों का खाना

चारपाई से लेकर गृहस्थी का सामान तक ट्रेलर के साथ ही चल रहा है। करीब 30 लोगों का खाना ट्रेलर पर बनता है। रात में जहां काफिला रुकता है, वहीं तिरपाल से बनाए गए अस्थायी ठिकानों में कर्मचारी सोते हैं।

तीन राज्यों से होकर पहुंचा उप्र वैक्यूम बायलर बेल्जियम से समुद्री मार्ग से पारादीप बंदरगाह पहुंचा। वहां से सड़क मार्ग से झारखंड, बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश में चंदौली पहुंचा। रास्ते में कई जगह पुल, फुट ओवरब्रिज, बिजली की लाइन और सड़क की चौड़ाई बाधा बनी।

बिहार के कैमूर में पुल के कुछ हिस्से को तोड़कर रास्ता तैयार करना पड़ा। जहां सड़क संकरी मिली, वहां पहले टीम ने मार्ग तैयार किया, इसके बाद ट्रेलर आगे बढ़ा। अब बनारस से गाजीपुर और आजमगढ़ होते हुए इसे बलरामपुर चीनी मिल पहुंचाया जाएगा।

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