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देवरिया में सूरज के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन भी पसरा सन्नाटा, गमगीन हुआ पूरा गांव

Published: Mon, 05 Oct 2026 10:54 PM (IST)

देवरिया के करमाजीतपुर गांव में सूरज यादव के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन भी गहरा सन्नाटा पसरा है, जहां परिवार ...और पढ़ें

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संवाद सूत्र, देवरिया। करमाजीतपुर में सोमवार को सूरज तो नहीं निकला, लेकिन उसके घर के आंगन में गम का अंधेरा और गहरा हो गया। 23 वर्षीय सूरज यादव के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन भी गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। जिस घर में कभी सूरज की आवाज गूंजती थी, वहां अब हर तरफ सिसकियां सुनाई दे रही हैं। दरवाजे पर पहुंचने वाला हर शख्स परिवार का दर्द देखकर अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पा रहा था।

सूरज के अंतिम संस्कार के बाद सोमवार को भी रिश्तेदारों और ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शाम को नजदीकी परिजनों के साथ अन्न ग्रहण की रस्म पूरी हुई। रस्म निभ रही थी, लेकिन परिवार के सदस्यों का मन बेटे और पोते की याद में डूबा हुआ था। महज तीन माह पहले पाना देवी की हार्ट सर्जरी हुई थी।

उम्र के इस पड़ाव पर जिस पोते की मौजूदगी उनका सहारा थी, उसी के अचानक चले जाने ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया है। सूरज का नाम आते ही उनकी आंखें नम हो जा रही हैं। परिजन उन्हें संभालने में जुटे हैं, लेकिन उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा। बेटे को खोने के बाद पुष्पा देवी और ओमप्रकाश यादव बदहवास हैं।

घर आने वाले लोगों को देखते ही उनकी आंखें बरबस सूरज को तलाशने लगती हैं। कुछ पल के लिए उम्मीद जैसी उठती है, फिर हकीकत सामने आते ही आंखों से आंसू बहने लगते हैं। बेटे की तस्वीर और उसकी यादें ही अब परिवार के पास बची हैं। पूरे गांव की संवेदनाएं इस परिवार के साथ हैं, लेकिन सूरज की कमी शायद कभी पूरी नहीं हो पाएगी।

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