देवरिया के तीन युवाओं की हो चुकी है समुद्री हमले में मौत, सपने थे एक जैसे, पहले शिवानंद-अभिषेक और अब बुझा 'सूरज'
देवरिया के तीन युवाओं, शिवानंद, अभिषेक और सूरज, की समुद्री हमलों में दुखद मृत्यु हो गई। वे सभी परिवार की ...और पढ़ें

बाएं से अभिषेक निषाद, शिवानंद चौरसिया और सूरज यादव की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
सूरज यादव ओमान तट के पास समुद्री हमले में मारे गए।
अभिषेक निषाद यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास रूसी हमले में शहीद।
शिवानंद चौरसिया की ओमान तट पर अमेरिकी हमले में जान गई।
पवन कुमार मिश्र, देवरिया। पहले शिवानंद चौरसिया व अभिषेक निषाद और अब सूरज यादव...। तीन नाम, तीन परिवार व सपने भी लगभग एक जैसे। घर की तंगी दूर करने, परिवार की जिंदगी संवारने व बेहतर भविष्य की उम्मीद में तीनों युवा हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में उतरे थे। उन्हें क्या पता था कि जिस रोजगार को परिवार की खुशहाली का रास्ता समझकर चुना है, वही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। अलग-अलग समुद्री हमलों में तीनों की जान चली गई। अब इन परिवारों में कमाई की उम्मीद की जगह अपनों को खोने का गम है।
तीनों की कहानी अलग थी, लेकिन घर से निकलने की वजह एक ही थी-रोजगार व परिवार का बेहतर भविष्य। किसी को पहली सैलरी से भाई-बहनों की पढ़ाई में मदद करनी थी तो किसी को घर की आर्थिक तंगी दूर करनी थी। समुद्र की लहरों के बीच वे अपने परिवारों के सपनों को नई उड़ान देना चाहते थे, लेकिन हमलों ने उनके साथ ही उन सपनों को भी डुबो दिया।
सपनों को पंख देना चाहते थे सूरज
गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव के सगड़ा टोला निवासी 23 वर्षीय सूरज यादव ने रोजगार की तलाश में समुद्री क्षेत्र को चुना था। देहरादून की ओशिनिक मैरीटाइम एकेडमी से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें की लाइन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड में नौकरी मिली। वह एमवी केप दाओ पर तैनात थे। ओमान के पूर्वी तट के पास हुए हमले की चपेट में आने से सूरज की मृत्यु हो गई। परिवार की खुशहाली के लिए समुद्र पार गए सूरज अब कभी घर नहीं लौटेंगे।
रोजगार की तलाश में गए अभिषेक का 34 दिन बाद लौटा था शव
गौरीबाजार के करमेल गांव निवासी 22 वर्षीय अभिषेक निषाद भी परिवार का भविष्य बेहतर करने के लिए समुद्री जहाज पर नौकरी करने गए थे। 10 जुलाई को वाराणसी से मुंबई पहुंचे और 11 जुलाई को तुर्किए के रास्ते जहाज पर सवार हुए। मक्का के लिए माल लेकर जा रहे गोल्डन लियो पर 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के निकट रूसी मिसाइल हमला हुआ।
इसमें अभिषेक समेत चार भारतीय क्रू सदस्यों की मृत्यु हो गई। हमले में शव क्षत-विक्षत हो जाने के कारण पहचान आसान नहीं थी। डीएनए जांच के बाद अभिषेक की पहचान हुई। 34 दिन बाद 23 अगस्त को उनका शव यूक्रेन से मोल्दोवा के रास्ते दिल्ली पहुंचा। जिस परिवार को बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद थी, उसे आखिरकार अंतिम दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
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शिवानंद का रोजगार का सफर भी मौत पर हुआ था खत्म
सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया भी परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए समुद्री जहाज पर काम कर रहे थे। ओमान तट के निकट एमटी सेटेबेलो पर 10 जून को हुए अमेरिकी हमले में उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिवार शव के स्वदेश लौटने की प्रतीक्षा करता रहा।
केंद्र सरकार व भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क किया गया। सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने भी शव स्वदेश लाने के लिए पैरवी की। आखिरकार 17 जून को शिवानंद का शव दिल्ली पहुंचा।
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