देवरिया के किसान परेशान, आलू बेचें तो घाटा, कोल्ड स्टोर में रखें तो बढ़ेगा बोझ
देवरिया में आलू किसानों को कम बाजार भाव और बढ़ते भंडारण-ढुलाई खर्च के कारण भारी नुकसान हो रहा है। किसान ...और पढ़ें

लागत डूबने के डर से किसान असमंजस में। जागरण
HighLights
आलू भंडारण, ढुलाई पर 42 हजार रुपये खर्च।
बाजार में 100 क्विंटल आलू का भाव 30-50 हजार।
किसान लागत डूबने के डर से असमंजस में।
श्याम नारायण मिश्र, देवरिया। बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू अब किसानों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। बाजार में भाव इतना कम है कि उपज बेचने पर भंडारण और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर, कीमत बढ़ने की आस में आलू कोल्ड स्टोरेज में रोके रखने पर खर्च और बढ़ने का खतरा है। इस दोहरी मार ने किसानों को ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है, जहां आलू निकालने और रोकने, दोनों में नुकसान की आशंका है।
भागलपुर के किसान मारकंडेय तिवारी ने बड़हलगंज के कोल्ड स्टोरेज में 100 क्विंटल आलू रखा है। उनके मुताबिक, भंडारण के लिए 30 हजार रुपये देने पड़े। पल्लेदारी पर दो हजार और बड़हलगंज से भागलपुर तक आलू लाने-ले जाने में करीब 10 हजार रुपये खर्च हुए। इस तरह केवल भंडारण और ढुलाई पर ही 42 हजार रुपये का बोझ पड़ गया। अब बाजार में भाव कम होने के कारण उन्हें उपज बेचने का फैसला लेने में परेशानी हो रही है।
जमुआ के किसान विनोद मिश्र बताते हैं कि 100 क्विंटल आलू बेचने पर थोक बाजार में करीब 40 से 50 हजार रुपये मिल पा रहे हैं, जबकि कोल्ड स्टोरेज पर बेचने से महज 30 से 35 हजार रुपये मिलने की स्थिति है। ऐसे में कम भाव पर आलू बेचने से भंडारण और ढुलाई का खर्च तक पूरा नहीं हो पा रहा है। खेती की वास्तविक लागत जोड़ने पर नुकसान और बढ़ जाएगा।
35 हजार की उपज, खर्च 42 हजार रुपये
आंकड़ों का गणित किसानों की परेशानी साफ बयां करता है। यदि 100 क्विंटल आलू से 35 हजार रुपये मिलते हैं तो भंडारण, पल्लेदारी और ढुलाई पर खर्च 42 हजार रुपये के मुकाबले सात हजार रुपये की कमी रह जाएगी।
यदि बिक्री से 50 हजार रुपये भी मिलते हैं तो इन खर्चों को घटाने के बाद केवल आठ हजार रुपये बचेंगे। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, दवा, मजदूरी और आलू की खोदाई पर आया खर्च शामिल नहीं है। यानी खेती की लागत जोड़ने पर मुनाफे की उम्मीद और कमजोर पड़ जाती है।
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कीमत बढ़ने की आस में रोकी उपज
किसानों को उम्मीद है कि बाजार में मांग बढ़ने पर आलू की कीमतों में सुधार होगा। इसी आस में वे फिलहाल उपज निकालने से बच रहे हैं। लेकिन लंबे समय तक भंडारण करने पर अतिरिक्त शुल्क, आलू की गुणवत्ता में गिरावट और कीमतों में सुधार नहीं होने का जोखिम भी बना हुआ है। किसान चाहते हैं कि भाव में इतना सुधार हो जाए कि भंडारण और ढुलाई का खर्च निकालने के बाद खेती की लागत की भरपाई की उम्मीद बच सके। फिलहाल कम कीमत और बढ़ते खर्च के बीच आलू किसानों की कमाई का गणित बिगड़ गया है।
