पेंशनरों और कारोबारियों को मिली बड़ी राहत, जीवन प्रमाणपत्र और जीएसटी नियमों में बदलाव
पेंशनरों को अब घर बैठे स्मार्टफोन से चेहरे की पहचान द्वारा जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा मिली है।
-1793640352752_m.webp)
प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पेंशनर घर बैठे स्मार्टफोन से जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकेंगे।
चेहरे की पहचान तकनीक से डिजिटल प्रमाण पत्र जमा होगा।
कारोबारियों के लिए जीएसटी क्रेडिट नोट नियम हुए आसान।
जागरण संवाददाता, देवरिया। नवंबर की शुरुआत के साथ पेंशनरों और कारोबारियों के लिए दो अहम बदलाव लागू हो गए हैं। अब पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बैंक या कोषागार के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्मार्टफोन से चेहरे की पहचान कर घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा किया जा सकेगा।
वहीं, कारोबारियों को बिक्री के बाद ग्राहकों को दी जाने वाली छूट पर जीएसटी क्रेडिट नोट जारी करने में राहत मिली है। नई व्यवस्था से पेंशन संबंधी औपचारिकताएं और कारोबार का हिसाब-किताब आसान होगा।
घर बैठे चेहरे की पहचान से जमा होगा जीवन प्रमाणपत्र
पेंशन जारी रखने के लिए हर वर्ष जीवन प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य है। वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल पांडेय ने बताया कि एक से 30 नवंबर तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत पेंशनर स्मार्टफोन से घर बैठे यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए जीवन प्रमाण और आधार फेस आरडी एप डाउनलोड करना होगा।
आधार, मोबाइल नंबर, पीपीओ और पेंशन खाते का विवरण भरने के बाद ओटीपी सत्यापन और चेहरे की पहचान करानी होगी। इसके बाद डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र संबंधित पेंशन वितरण एजेंसी तक पहुंच जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिले में कुल 22,791 पेंशनर हैं। इनमें 4,679 सेवानिवृत्त शिक्षक और 18,112 अन्य विभागों के पेंशनर शामिल हैं। पिछले वर्ष करीब 80 से 85 प्रतिशत पेंशनरों ने आफलाइन और 15 से 20 प्रतिशत ने डिजिटल माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र जमा किया था। स्मार्टफोन नहीं होने या तकनीकी परेशानी आने पर बैंक, डाकघर और जीवन प्रमाण केंद्रों की मदद ली जा सकती है।
बिक्री के बाद छूट देने पर क्रेडिट नोट जारी करना आसान
उपायुक्त राज्य कर विवेक मिश्र ने बताया कि एक नवंबर 2026 से लागू नए नियमों के तहत कारोबारियों के लिए बिक्री के बाद ग्राहकों को छूट देने की प्रक्रिया आसान हो गई है। पहले सालाना बोनस, बिक्री लक्ष्य पूरा करने पर प्रोत्साहन राशि या टर्नओवर आधारित छूट को जीएसटी के करयोग्य मूल्य से घटाने के लिए कई शर्तें पूरी करनी पड़ती थीं।
छूट का समझौता सप्लाई से पहले या उसके समय होना और उसे संबंधित इनवाइस से जोड़ना जरूरी था। नई व्यवस्था में ये दोनों शर्तें हटा दी गई हैं। अब विक्रेता नियमानुसार जीएसटी क्रेडिट नोट जारी कर सकता है।
इसके लिए खरीदार को संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) रिवर्स करना होगा। इससे डीलर डिस्काउंट, सालाना बोनस और प्रोत्साहन योजनाओं का हिसाब-किताब पहले की तुलना में आसान होगा।
यह भी पढ़ें- लखनऊ में मृत चतुर्थ श्रेणी कर्मी की नौकरी पाने के लिए रची शादी की साजिश, एक ही नंबर पर मिले दो विवाह प्रमाणपत्र
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।