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देवरिया में बीमारी से जूझते मरीजों पर ‘स्ट्रेचर टैक्स’ की मार, 100 रुपये में मिल रहा सहारा

By Saurabh Kumar MishraEdited By: Vivek Shukla
Published: Fri, 11 Sep 2026 03:35 PM (GMT+05:30)

देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज से पहले स्ट्रेचर, बेड और दवाओं के लिए जूझना ...और पढ़ें

HighLights

  1. मरीज स्ट्रेचर के लिए 100 रुपये देने को मजबूर।

  2. इमरजेंसी और ओपीडी में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

  3. दवा काउंटर पर लंबी कतारें, धक्का-मुक्की की नौबत।

सौरभ कुमार मिश्र, देवरिया। सरकारी अस्पताल में मरीज बीमारी से लड़ने की उम्मीद लेकर पहुंचता है, लेकिन यदि इलाज से पहले उसे स्ट्रेचर, बेड और दवा के लिए जूझना पड़े तो सवाल व्यवस्था पर ही उठेंगे। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में गुरुवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

इमरजेंसी से लेकर ओपीडी और दवा वितरण काउंटर तक मरीज और तीमारदार व्यवस्थाओं की मार झेलते नजर आए। कहीं स्ट्रेचर के लिए घंटों इंतजार था तो कहीं फर्श ही मरीजों के बैठने और लेटने की जगह बना हुआ था। दवा के लिए लंबी कतार में खड़े मरीजों के बीच धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। सबसे गंभीर आरोप स्ट्रेचर को लेकर सामने आया।

भाटपाररानी की रघुपति देवी ने आरोप लगाया कि उन्हें स्ट्रेचर के लिए 100 रुपये देने पड़े। उनका कहना था कि अस्पताल आने पर हर बार स्ट्रेचर के लिए रुपये देने पड़ते हैं। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि मरीज की मजबूरी को निशाना बनाने का गंभीर मामला है।

इमरजेंसी में स्ट्रेचर के लिए भटकते रहे मरीज
दोपहर 12:52 बजे जागरण टीम इमरजेंसी पहुंची तो बाहर फर्श पर महिलाएं बैठी मिलीं। गायत्री देवी अपने घायल स्वजन गणेश गुप्ता को लेकर परेशान थीं। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में घायल होने के बाद भी करीब एक घंटे से स्ट्रेचर नहीं मिल सका। इसी दौरान भटवलिया निवासी रामबली यादव को स्वजन सहारा देकर अंदर ले जाते दिखाई दिए।

इमरजेंसी में राघवनगर की 80 वर्षीय मालती देवी स्ट्रेचर पर फर्श पर लेटी थीं। उनकी हालत गंभीर नजर आ रही थी। अंदर एक बेड पर दो-दो मरीज और कई मरीज स्ट्रेचर पर उपचार कराते मिले। परसिया निवासी विंदा देवी के स्वजन अमरेंद्र ने बताया कि सुबह से वरिष्ठ चिकित्सक के देखने का इंतजार है। इमरजेंसी के बाहर कई मरीज स्ट्रेचर के लिए परेशान दिखाई दिए।

ओपीडी में फर्श पर बैठी भीड़, घंटों करना पड़ रहा इंतजार
दोपहर 1:23 बजे नवीन ओपीडी में भी मरीजों की भारी भीड़ थी। बरामदे से लेकर चिकित्सकों के कक्ष तक मरीज अपनी बारी के इंतजार में खड़े और फर्श पर बैठे मिले। मेडिसिन विभाग में डा. सिराजुद्दीन ने 247 और डा. अतुल गुप्ता ने 175 मरीजों का उपचार किया। चर्म रोग विभाग में 332, नेत्र रोग में 239 और हड्डी रोग विभाग में 347 मरीज देखे गए। सर्जरी विभाग में 152 और 67 मरीजों का उपचार हुआ।

मरीजों ने पांच घंटे से अधिक इंतजार करने की शिकायत की। टीबी एवं श्वांस रोग विभाग में 155 और मानसिक रोग विभाग में 145 मरीजों का उपचार हुआ। पैथोलाजी में दोपहर दो बजे तक 602 मरीजों का पंजीकरण हो चुका था। आंकड़े खुद बता रहे थे कि अस्पताल पर मरीजों का कितना दबाव है, लेकिन उसी अनुपात में सुविधाएं नजर नहीं आईं।

दवा के लिए चार घंटे की कतार, धक्का-मुक्की में हाथापाई की नौबत

दोपहर 2:20 बजे दवा वितरण काउंटर पर स्थिति और विकट थी। महिलाएं और पुरुष घंटों से लाइन में खड़े थे। भीड़ बढ़ने के साथ धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते हाथापाई की नौबत आ गई। सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह स्थिति संभाली। कपरवार निवासी विनय शर्मा ने बताया कि पत्नी के पैर में परेशानी है और दवा के लिए चार घंटे से इंतजार कर रहे हैं। उनका सवाल था कि आखिर अपनी पीड़ा किससे कहें।

महुआडीह निवासी राकेश ने बताया कि सुबह से अस्पताल में हैं, लेकिन दोपहर दो बजे तक दवा की दो खुराक भी नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि हर जगह लंबी लाइन है और अब यहां उपचार कराने के बजाय निजी अस्पताल जाना बेहतर लगेगा।

बेड फुल, वार्ड में भीड़ का दबाव
मेडिसिन, सर्जरी और आर्थो वार्ड के सभी बेड भरे मिले। मरीजों के साथ आए तीमारदारों की भीड़ से स्थिति और जटिल हो गई। मौके पर सुरक्षा कर्मी भी नजर नहीं आए। एक ओर तीमारदारों की भीड़ थी तो दूसरी ओर सफाई कर्मी फर्श साफ करने में जुटे थे। स्टाफ नर्सों ने बताया कि तीमारदारों को बाहर जाने के लिए कहने पर कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है।

मरीजों की संख्या बढ़ना निश्चित रूप से अस्पताल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है, लेकिन फर्श पर मरीजों का इलाज, स्ट्रेचर के लिए भटकना और दवा के लिए घंटों इंतजार केवल भीड़ का परिणाम कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिस मेडिकल कालेज पर हजारों मरीजों की उम्मीद टिकी है, वहां व्यवस्था को मरीजों की संख्या और जरूरत के अनुरूप मजबूत करना जरूरी है।

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मरीजों की संख्या पहले की अपेक्षा बढ़ी है। बेहतर उपचार के निर्देश दिए गए हैं और समय-समय पर निरीक्षण कर कार्रवाई भी की जाती है। मरीजों की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हुए बेहतर उपचार का प्रयास किया जा रहा है। रही बात स्ट्रेचर के लिए वसूली की तो इसकी जांच कराई जाएगी।

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-डा. एचके मिश्र, सीएमएस