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देवरिया के 151 गांवों में बारिश नहीं बरसी ‘हाजिरी’, जांच में अफसरों ने दे दी क्लीन चिट

Published: Sat, 10 Oct 2026 12:48 PM (GMT+05:30)

देवरिया में भारी बारिश के दौरान वीबीजी-रामजी योजना के तहत हजारों मजदूरों की हाजिरी लगाई गई, जिस पर सवाल उठे ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. तीन दिन की बारिश में 13,754 मजदूरों की हाजिरी।

  2. अधिकारियों ने जांच में काम को क्लीन चिट दी।

  3. मौसम के आंकड़ों और जमीनी हकीकत में विरोधाभास।

जागरण संवाददाता, देवरिया। खेत पानी से लबालब, लगातार तीन दिन बारिश और वीबीजी-रामजी योजना के पोर्टल पर हजारों मजदूरों की हाजिरी। सवाल उठा तो जांच हुई और अधिकारियों ने काम को सही ठहरा दिया। दावा किया गया कि जिन स्थानों पर मजदूरों से काम कराया गया, वहां बारिश नहीं हुई थी। लेकिन मौसम के आंकड़े और मौके की स्थिति जांच के निष्कर्षों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आखिर जब बारिश से खेतों में पानी भर गया था, तब मजदूरों ने फावड़ा कहां चलाया? यह सवाल अब भी जवाब मांग रहा है।

सितंबर में 25, 26 और 27 तारीख को जिले में वर्षा का सिलसिला जारी रहा। मौसम के आंकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर को 16.6 मिलीमीटर, 26 को 20.6 मिलीमीटर और 27 सितंबर को 75.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इन तीन दिनों में वीबीजी-रामजी योजना के तहत सड़क निर्माण और पौधरोपण समेत अन्य कार्यों में कुल 13,754 मजदूरों की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज की गई। इनमें 25 सितंबर को 6,367, 26 को 2,564 और 27 सितंबर को शेष मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

दो अक्टूबर को इस मामले को दैनिक जागरण प्रमुखता ये खबर प्रकाशित की तो जिलाधिकारी ने इसकी जांच कराने के निर्देश दिए। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों पर काम कराया गया, वहां बारिश नहीं हुई थी। मजदूरों ने भी पूछताछ में काम करने की बात भी स्वीकार की।

अधिकारियों के अनुसार, मजदूरों ने बताया कि तीनों दिन सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं पर काम किया गया तथा कार्यस्थल पर बारिश नहीं हुई। हालांकि, बारिश के व्यापक आंकड़ों और खेतों में पानी भरने की स्थिति के बीच यह दावा चर्चा का विषय बना हुआ है।

कुण्डावल हरी में चकरोड निर्माण पर भी सवाल
भागलपुर ब्लाक के कुण्डावल हरी गांव में विरेंद्र के चक से सुरेंद्र के चक तक चकरोड निर्माण का कार्य पोर्टल पर दर्ज है। इसमें 27 सितंबर को कन्हैया, गेनू प्रसाद और अरविंद समेत करीब दस मजदूरों की हाजिरी दिखाई गई है। जागरण की पड़ताल के दौरान मजदूरों ने उस दिन बारिश होने के कारण काम नहीं करने की बात कही थी। जिस चकरोड पर निर्माण कार्य दर्शाया गया, उसे ट्रैक्टर से समतल किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। उपायुक्त श्रम एवं रोजगार आलोक कुमार पांडेय ने गांव पहुंचकर इसकी जांच की।

उनका कहना है कि पूछताछ में मजदूरों ने 27 सितंबर को सड़क निर्माण का कार्य होने की बात स्वीकार की। उनके अनुसार, उस दिन बारिश शाम को शुरू हुई थी। इसी आधार पर जांच में कार्य को सही पाया गया। इस तरह लगातार तीन दिन हुई वर्षा, खेतों में भरे पानी और मजदूरों के पहले दिए गए बयानों के बीच जांच के निष्कर्षों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कार्यस्थल पर बारिश नहीं हुई थी, तो इसकी पुष्टि किस आधार पर की गई?

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क्या मौके पर काम होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले और क्या पोर्टल पर दर्ज हाजिरी का भौतिक सत्यापन किया गया? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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बारिश के दौरान हुए कार्यों की जांच में मजदूरों ने बताया है कि तीनों दिन सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं पर काम किया गया। मजदूरों के अनुसार, कार्य के दौरान वहां बारिश नहीं हुई थी।

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-आलोक कुमार पांडेय, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार