देवरिया में 30 साल की सिविल जज जागृति का निधन, न्यायिक जगत में शोक
देवरिया की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) जागृति का 30 वर्ष की आयु में लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन ...और पढ़ें

सिविल जज जागृति की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
सिविल जज जागृति का 30 वर्ष की आयु में निधन।
लीवर की बीमारी से जूझ रही थीं, लखनऊ में उपचार।
न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने दी श्रद्धांजलि।
विधि संवाददाता, देवरिया। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) जागृति का गुरुवार रात लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लीवर की बीमारी से जूझ रही थीं और करीब दो माह से उनका उपचार चल रहा था। महज 30 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर से न्यायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।
मूलरूप से बलिया की रहने वाली जागृति लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र के बिक्रमनगर में अपने पिता रामकुमार राम के साथ रहती थीं। उनके पिता सेवानिवृत्त रेलकर्मी हैं। जागृति शुरू से ही मेधावी छात्रा थीं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एलएलएम की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून में पीएचडी कर रही थीं। इसी दौरान वर्ष 2024 में उनका चयन न्यायिक अधिकारी के रूप में हुआ।
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उनके निधन पर जनपद न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह के न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने कोर्ट रेफरेंस कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके व्यक्तित्व और व्यवहार को याद करते हुए लोग भावुक हो गए। प्रधान न्यायाधीश ब्रजेश मणि त्रिपाठी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी इफ्तेखार अहमद और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रज्ञा सिंह सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
