चित्रकूट में फिर से बढ़ने लगा मंदाकिनी नदी का जलस्तर, खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर बह रहा पानी
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर शनिवार की बाढ़ के बाद फिर से बढ़ गया है, जो खतरे के निशान ...और पढ़ें
HighLights
मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर।
चित्रकूट में लगातार बारिश से नदी का पानी फिर बढ़ा।
रामघाट और नदी किनारे की बस्तियों में फिर अफरातफरी।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। शनिवार की भीषण बाढ़ से मिले जख्मों पर अभी लोग मरहम भी नहीं लगा पाए थे कि मंदाकिनी ने सोमवार को फिर चिंता बढ़ा दी। रविवार को जलस्तर घटने से रामघाट और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन रात करीब 11 बजे नदी का पानी दोबारा बढ़ने लगा।
मध्यप्रदेश के सीमावर्ती सतना और चित्रकूट में लगातार हो रही बारिश का असर सोमवार सुबह साफ दिखाई दिया। सुबह साढ़े पांच बजे मंदाकिनी का जलस्तर 128.550 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 126.500 मीटर से 2.05 मीटर ऊपर है।
रविवार शाम नदी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर नीचे आ गई थी। बढ़ते पानी की आहट मिलते ही रामघाट और नदी किनारे की बस्तियों में फिर अफरातफरी मच गई। शनिवार की बाढ़ में घर-दुकान और सामान गंवाने वाले लोग दोबारा सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे।
प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की अपील की है। मंदाकिनी शनिवार को रिकार्ड 135.200 मीटर तक पहुंच गई थी। भीषण बाढ़ में 800 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। दो लोगों की मौत भी हुई।

रामघाट की दुकानों और मठ-मंदिरों में पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ। तुलसीदास की प्रतिमा और मंदिर भी क्षतिग्रस्त हुआ। हनुमानधारा मार्ग का करीब 40 वर्ष पुराना पुल बह गया, जबकि मोहकमगढ़ पुल और झांसी-मीरजापुर हाईवे का कर्वी पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ।
अब दोबारा बढ़ता जलस्तर उन परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है, जो बाढ़ उतरने के बाद अपने घरों और दुकानों की सफाई में जुटे थे। बारिश जारी रहने से प्रशासन के सामने राहत के साथ लोगों को सुरक्षित रखने की चुनौती फिर खड़ी हो गई है।
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