चित्रकूट में मंदाकिनी का वेग घटा पर छोड़ गई तबाही का मंजर, हनुमानधारा पुल बहा; बचाए गए 800 लोग
मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप शांत होने के बाद चित्रकूट में भारी तबाही का मंजर छोड़ गया, जिसमें हनुमानधारा पुल ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
मंदाकिनी बाढ़ से चित्रकूट में भारी तबाही, हनुमानधारा पुल ध्वस्त हुआ।
40 गांव प्रभावित, 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मंदाकिनी का रौद्र रूप रविवार को शांत हुआ, लेकिन शनिवार को 23 वर्ष बाद आई इतनी भीषण बाढ़ ने तबाही की कहानी लिख दी। रामघाट और आसपास के इलाकों में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी, पर बाढ़ का असर चित्रकूट के 84 कोस में है।
40 गांवों-बस्तियों पर असर पड़ा है। करीब पांच हजार लोग बाढ़ में फंसे थे, जिनको निकालने के लिए वायुसेना, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को लगाया गया था। प्रशासन ने प्रभावित भवनों और धार्मिक स्थलों में तलाशी अभियान शुरू किया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और राहत शिविर पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने नुकसान का सर्वे कराकर राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।मंदाकिनी शनिवार को खतरे के निशान से 8.70 मीटर ऊपर 135.200 मीटर के रिकार्ड स्तर पर बह रही थी।
रविवार शाम पांच बजे पानी घटकर खतरे के निशान 126 मीटर पर पहुंच गया। बाढ़ से कई प्रमुख रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। देवांगना से कामदगिरि को जोड़ने वाला करीब 40 वर्ष पुराना हनुमानधारा पुल बह गया, सिर्फ पिलर बचे हैं। लोगों को करीब 10 किमी दूरी तय कर मोहकमगढ़ पुल से जाना पड़ रहा है।
यह पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत करा दी गई है। झांसी-मीरजापुर हाईवे पर कर्वी में बांदा की ओर मंदाकिनी नदी पुल का एप्रोच मार्ग का करीब 10 फीट हिस्सा धंस गया है। बड़े वाहनों का आवागमन बंद है। चित्रकूट-सतना मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया, लेकिन मानिकपुर-सतना मार्ग पर रपटा और सड़क बह जाने से रास्ता बंद है।
मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया है। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी रशीद खान ने बताया कि ट्रैक से पानी निकल गया है। तरौंहा में जगदेव दास अखाड़ा और क्योटरा के निचले इलाकों में 25 से अधिक कच्चे मकान गिर गए। बिजली आपूर्ति बंद होने से पेयजल का संकट है।
शिवहरे धर्मशाला में शनिवार रात बिहार के 60 वर्षीय कमला शरण, उनके साथ 55 वर्षीय हनुमान स्वामी और 80 वर्षीय बक्के भक्त फंस गए। कमला शरण की मौत हो गई। हनुमान स्वामी और बक्के भक्त ने छत में लगे पंखों के सहारे करीब तीन घंटे जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। उन्होंने बताया कि थकने पर पानी में नीचे आते और फिर पंखे पकड़ लेते।
अनुसुइया आश्रम में 43 संत-सेवक और 50 से अधिक दुकानदार भी फंसे रहे। गोबरिया में 19 लोगों ने पेड़ों पर चढ़ खुद को बचाया। डीएम पुलकित गर्ग के अनुसार, रातभर चले रेस्क्यू अभियान में 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
भारी वर्षा से आया पानी
मंदाकिनी का मूल जलग्रहण क्षेत्र सतना जिले के मझगवां क्षेत्र की खिल्लोरा पहाड़ियों और पिंडरा गांव के आसपास से शुरू होता है। नदी सतना के पहाड़ी-विंध्य क्षेत्र से होते हुए चित्रकूट पहुंचती है। आगे उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिल जाती है।
1900 वर्ग किमी के कैचमेंट क्षेत्र में नदी के फ्लड-प्लेन में निर्माण, अतिक्रमण से सिकुड़े जलमार्ग और नालों में गाद-कचरे ने पानी की गति रोक दी। शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक सतना जिले में औसतन 120 मिमी वर्षा दर्ज की गई। शनिवार दिन में भी करीब नौ घंटे में सात मिमी वर्षा और हुई यानी 33 घंटे में करीब 127 मिमी वर्षा हुई।
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