Chitrakoot Flood: मंदाकिनी की बाढ़ से घर डूबे, गृहस्थी बर्बाद, पानी उतरने के बाद तरौंहा में सिर्फ तबाही
मंदाकिनी नदी का पानी उतरने के बाद चित्रकूट की तरौंहा बस्ती में भारी तबाही का मंजर सामने आया है। 25 ...और पढ़ें
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तरौंहा के जयदेव दास अखाड़ा के पास संतोष का गिरा कच्चा मकान। जागरण
HighLights
25 से अधिक कच्चे मकान ढहे, सैकड़ों घर बर्बाद हुए
अनाज, किराने का सामान और पशुओं का चारा भीगा
24 घंटे बिजली गुल, पेयजल संकट से लोग परेशान
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मंदाकिनी का पानी उतरने लगा तो तरौंहा बस्ती के लोगों को राहत की बजाय तबाही का सामना करना पड़ा। शनिवार को बाढ़ का पानी घरों में घुसा तो परिवार जान बचाने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल या ऊंचे स्थानों पर चले गए।
रविवार को पानी कुछ कम हुआ तो लौटे लोगों के सामने बर्बाद गृहस्थी, ढही दीवारें और कीचड़ से सने घर थे। जगदेव दास अखाड़ा और क्योटरा के निचले इलाकों में 25 से अधिक कच्चे मकान भरभराकर गिर गए। सैकड़ों घरों में रखा सामान पानी में भीगकर खराब हो गया। किसी का आटा नहीं बचा तो किसी की दुकान का हजारों रुपये का सामान बर्बाद हो गया।
जगदेव दास अखाड़ा के पास रहने वाले दादू लाल और प्रेम अतरौलिया की गृहस्थी के साथ घर में चल रही किराने की दुकान भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। दादू लाल ने दर्द बयां करते हुए कहा कि पानी घर में घुसा तो सामान बचाने का मौका ही नहीं मिला।

रामघाट की होटल में पानी के बाद खराब पड़ा सामान और फैला हुआ किचड़। जागरण
घर में रखा किराने का सामान भीगकर खराब हो गया। अब खाने के लिए आटा तक नहीं बचा है। मनोहर लाल ने बताया कि घर का पूरा सामान बर्बाद हो गया। मवेशियों के लिए रखा भूसा भी पानी में भीगकर खराब हो गया।
15 कच्चे घर गिर गए
बाढ़ बढ़ने पर राजू कुशवाहा, संतोष कुमार, मूलचंद्र और यशवंत कुशवाहा समेत कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। वापस लौटे तो कच्चे मकान उनका साथ छोड़ चुके थे। जगदेव दास अखाड़ा के पास 15 से अधिक कच्चे घर गिर गए। क्योटरा में भी हनुमंत लाल पांडेय समेत कई परिवारों के मकान धराशायी हो गए।

पानी उतरने के बाद दुकान की सफाई- करते हुए दुकानदार। जागरण
पहले जान बचाई, अब ढूंढ रहे सामान
बादी कुशवाहा, अशोक कुशवाहा और कल्लू गर्ग के घरों की दीवारें भी गिर गईं। उधर, अमानपुर की कुशवाहापुरवा में भी शिव चरण कुशवाहा, पन्नालाल कुशवाहा, सुरेश कुशवाहा, रामबाबू कुशवाहा और कुच्ची कुशवाहा के कच्चे मकान ढह गए। बाढ़ उतरने के बाद अब प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती छत, भोजन, पानी और उजड़ी गृहस्थी को फिर से खड़ा करने की है।

तरौंहा के शहीद बाबा मुहल्ले में जल संस्थान का टैंकर पहुंचते ही पानी भरने को उमड़ी भीड़। जागरण
पानी के बाद बिजली का संकट
तरौंहा बस्ती में शनिवार सुबह करीब दस बजे गुल हुई बिजली 24 घंटे तक नहीं आई। घरों में पानी और बाहर कीचड़ के बीच लोगों को पेयजल के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। रविवार सुबह सार्वजनिक हैंडपंपों से पानी लेकर लोगों ने घरों की सफाई शुरू की। सुबह दस बजे के बाद जल संस्थान का टैंकर पहुंचा तो पानी लेने के लिए बस्ती में भीड़ उमड़ पड़ी।
शनिवार को कोई पूछने तक नहीं आया
अफजल अली, दिनेश पांडेय और रामनरेश समेत कई वाशिंदों ने आरोप लगाया कि शनिवार को बस्ती में बाढ़ का पानी भरने के बाद भी प्रशासन का कोई प्रतिनिधि हाल जानने नहीं पहुंचा। लोगों ने कहा कि जब पानी घरों में घुस रहा था, तब वे भगवान भरोसे रहे। रविवार सुबह दस बजे के बाद नगर पालिका के कर्मचारी और जेसीबी पहुंची। सड़कों से कीचड़ हटाने का काम शुरू हुआ और जल संस्थान के टैंकरों से पानी पहुंचाया गया।
