Chitrakoot News: SC-ST Act और धमकियों के बाद युवक की मौत, मामले ने पकड़ा तूल; इंटरनेट मीडिया पर बहस
चित्रकूट में एससी-एसटी एक्ट और दुष्कर्म के झूठे मुकदमे की धमकी से परेशान 20 वर्षीय देवानंद द्विवेदी ने आत्महत्या कर ...और पढ़ें

रोते बिलखते देवा उर्फ देवानंद द्विवेदी के स्वजन। ग्रामीण
HighLights
चित्रकूट में देवानंद ने एससी-एसटी एक्ट की धमकी से आत्महत्या की
मामले में चार लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा
इंटरनेट मीडिया पर एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर बहस छिड़ी
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखे जाने व दुष्कर्म में फंसाने की धमकियों के बाद 20 वर्षीय देवानंद द्विवेदी उर्फ देवा ने जान दे दी। आत्महत्या के दो दिन बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। राजनीतिक व सामाजिक संगठन दिवंगत के घर पहुंच माहौल गरम कर रहे हैं।
परिवार ने मानसिक दबाव व धमकी देने के आरोप लगाए, जिस पर चार लोगों के विरुद्ध आत्महत्या दुष्प्रेरण की रिपोर्ट लिखी गई पर अभी कोई आरोपित नहीं पकड़ा गया है। उधर, इस प्रकरण के बाद इंटरनेट मीडिया पर महाराष्ट्र में आइआइटी छात्र व चित्रकूट में देवानंद की मृत्यु को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर भी फिर बहस छिड़ी है।
कुछ लोग एससी-एसटी एक्ट को ही खत्म कर देने की बात कह रहे हैं तो किसी ने लिखा कि वोट बैंक वालों को इस मृत्यु का कोई मायने नहीं दिख रहा, इसलिए वह चुप हैं। ऐसा तब होता है जब गुस्सा चुनिंदा हो, न्याय चुनिंदा हो और मौत को भी राजनीतिक फायदे के नजरिए से देखा जाए।
इस बीच देवानंद की मां सुशीला देवी ने कहा कि मेरा बेटा तो चला गया, अब जो दिखाई दे वही सरकार करे। मेरी और मेरे बेटे की पीड़ा को कोई समझे तो कुछ करे। देवानंद की मां की नजरें आज भी बेटे को तलाश रही हैं, जो अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
मां की पीड़ा और परिवार की व्यथा के बाद इंटरनेट मीडिया पर एससी-एसटी एक्ट को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा चल रही है। किसी ने लिखा कि अब नए नियमों की विष बेल सामने आ रही है। कुछ ने पोस्ट में उसके विरुद्ध पहले दर्ज छेड़खानी के मुकदमे का उल्लेख किया तो कई लोग परिवार के आरोपों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
पतेरिया गांव निवासी देवानंद ने रविवार शाम घर के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी थी। पिता रोशनलाल द्विवेदी का आरोप है कि 25 जुलाई को मामूली विवाद के बाद देवानंद के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद वह डर कर जिले से बाहर चला गया था।
गांव लौटने पर उसे दोबारा धमकी मिलने पर उसने जान दे दी। घटना वाले दिन 28 सितंबर को करीब दो घंटे तक स्वजन ने शव नहीं उठने दिया था। पुलिस ने देवा के भाई पुष्पराज की तहरीर पर ई-रिक्शा चालक संजय कुमार रैदास, शंकर दयाल गुप्ता, प्रिंस गुप्ता व विजय गुप्ता के विरुद्ध आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज की थी।
बता दें कि पूर्व प्रधान कल्लू पांडेय ने बताया था कि जुलाई में देवा अपने साथी सुधीर यादव के साथ बाइक से ऐंचवारा की ओर जा रहा था। रास्ते में गांव का संजय कुमार ई-रिक्शे से कुछ छात्राओं को कालेज छोड़ने जा रहा था। रास्ते में दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद संजय ने छात्राओं से अश्लील फब्तियां कसने, गालीगलौज और मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी।
पुलिस ने देवा और सुधीर के खिलाफ एससी-एसटी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। स्वजन के अनुसार मुकदमे के बाद देवा डरकर पंजाब चला गया था और तीन दिन पहले ही घर लौटा था। आरोप है कि रविवार को घर लौटते समय संजय और उसके साथियों ने रास्ते में उसे धमकी दी कि पहले एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराया है, अब दुष्कर्म के मामले में फंसा देंगे।
स्वजन का कहना है कि इससे देवा काफी परेशान था और घर पहुंचने के बाद उसने खुदकुशी कर ली। मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी और सवर्ण आर्मी के विजय शुक्ला, विनय मिश्रा व बरातीलाल पांडेय समेत अन्य लोग गांव पहुंचे। उन्होंने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने का विरोध किया।
अपर पुलिस अधीक्षक पीयूष कांत राय और थाना प्रभारी अजीत पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया। अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर संजय कुमार, शंकर दयाल, प्रेम प्रिंस और विजय के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज की गई।
