Chitrakoot Flood: मंदाकिनी बाढ़ से चित्रकूट में दहशत, घर-ग्रहस्थी और रास्ते तबाह, फिर मडराया खतरा
मंदाकिनी नदी में बाढ़ से चित्रकूट में फिर खतरा मंडरा रहा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं और सड़कें ...और पढ़ें

मंदाकिनी का घटा जलस्तर... मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में दो दिन कहर बरपाने वाली मंदाकिनी का जलस्तर सोमवार दोपहर बाद से घट गया। धीरज गुप्ता
HighLights
मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
हजारों परिवारों की गृहस्थी तबाह, सड़कें ध्वस्त
पेयजल, बिजली बाधित, पर्यटन व आवागमन ठप
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। शनिवार को मंदाकिनी की बाढ़ से मिले जख्म अभी सूखे भी नहीं थे कि सोमवार को फिर खतरा मंडराता दिखा। सोमवार सुबह नदी खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर पहुंच गई तो उन परिवारों की चिंता बढ़ गई, जो सामान्य जिंदगी में लौटने की कोशिश कर रहे थे।
शाम करीब पांच बजे नदी खतरे के निशान पर आ गई और पानी घट रहा है। एक सप्ताह से नदी का जलस्तर सात बार खतरे के निशान को पार कर चुका है। करीब 48 घंटे तक चली भीषण बाढ़ में यूपी-एमपी के 10 हजार से अधिक परिवारों की गृहस्थी प्रभावित हुई है। सड़कें ध्वस्त हैं। रपटे डूब गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित है।
मंदाकिनी शनिवार को खतरे के निशान से 8.70 मीटर ऊपर 135.200 मीटर के रिकार्ड स्तर पर बह रही थी। रविवार सुबह पानी घटा, लेकिन रात से मंदाकिनी फिर बढ़ने लगी। इस बीच रामघाट उजाड़ हो गया है। घाट की शान रहा तुलसी मंदिर बह गया और तुलसीदास ही प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई है। फुटओवर ब्रिज में लगीं टिन की चादरें बह गई हैं।

गुप्त गोदावरी में गुफा से उफन रही जलधारा। जागरण
घाट के आसपास की 400 से अधिक दुकानें बाढ़ की चपेट में आने से व्यापारियों की मुश्किल बढ़ गई है। पेयजल आपूर्ति के लिए बना इंटेकवेल पानी में डूब गया है और उसकी मशीनें खराब हो गईं। शहर के 20 मोहल्लों में 72 घंटे से नलों की धार सूखी है। बिजली न होने से सबमर्सिबल भी नहीं चल सके। गोबरिया गांव के लगभग 30 परिवार बेघर हो गए हैं। परसौंजा में 80 से अधिक कच्चे मकान जमींदोज हो गए। सिर छिपाने और दो वक्त के भोजन का संकट है।
भरतकूप के पहाड़ों में रात में तेज बारिश के चलते भरतकूप-कालिंजर मार्ग पर पानी भरने से आवागमन मुश्किल हो गया। टिकरिया रपटा बह जाने से मानिकपुर-सतना के बीच सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। लोगों को सतना जाने के लिए बांदा-कालिंजर-सिंहपुर और पन्ना मार्ग से करीब 200 किमी लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

बाढ़ से रामघाट में क्षतिग्रस्त तुलसीदास की प्रतिमा व मंदिर। जागरण
चित्रकूट-सतना मार्ग पर मझगवां के पास पिंडरा नदी का रपटा बहने से सतना जाने वालों की मुश्किल बढ़ गई है। कर्वी पर मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड सही हो गई है और बड़े वाहन निकलने लगे हैं।
रामघाट से गुप्त गोदावरी तक सन्नाटा
रामघाट से लेकर सती अनुसुइया, हनुमानधारा और स्फटिक शिला तक सन्नाटा पसरा है। होटल-धर्मशालाएं सूनी हैं। गुप्त गोदावरी की सीढ़ियों पर झर-झर पानी बह रहा है और पर्यटन बंद है। सामान्य दिनों में करीब 60 हजार श्रद्धालु-सैलानी प्रतिदिन तपोभूमि पहुंचते हैं, लेकिन इस समय 10 प्रतिशत भी नहीं पहुंच रहे। सुरक्षा कारणों से नौका संचालन बंद है। होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक सामान्य दिनों में पूरे क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता था।

डोडा बांध के क्षतिग्रस्त होने पर सुधार कार्य में जुटे सिंचाई विभाग के कर्मचारी और श्रमिक। जागरण
मोहरवां रपटा से बड़े वाहनों का आवागमन रोका
वाल्मिकी नदी में बने मोरहवां रपटा भी कमजोर हो गया है। मिट्टी का कटान होने पर भारी वाहनों को आवागमन बंद कर दिया गया है। थाना प्रभारी नरेश प्रजापति ने बताया कि डीएम के निर्देश पर यह किया गया है।
आज भी कक्षा आठ तक के स्कूलों में रहेगा अवकाश
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी रंजना शुक्ला ने बताया कि बारिश और बाढ़ को देखते हुए मंगलवार को भी कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के सभी स्कूलों में बच्चों के लिए अवकाश रहेगा। शिक्षक व स्टाफ समय से स्कूल पहुंचकर विभागीय कार्य करेंगे।
कई जिलों में बाढ़ का संकट
फर्रुखाबाद में गंगा चेतावनी बिंदु से 10 सेमी ऊपर बह रही है। अमृतपुर में गंगा का जलस्तर घटने के बाद गांवों से बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन खेतों में पानी भरा होने से फसलें खराब हो रही हैं। लोग बुखार व खाज खुजली से परेशान हैं। बांदा में केन घटी, यमुना बढ़ी और कई रपटों पर आवागमन बंद रहा। अगस्त में 400.9 मिमी बारिश ने आठ वर्षों का रिकार्ड तोड़ा। हमीरपुर में यमुना और बेतवा का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है।
फर्रुखाबाद में तीन सितंबर को आ सकते हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिले में संभावित दौरा तीन सितंबर को होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से संकेत मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इटावा-बरेली हाईवे पर रामगंगा पुल और डबरी गांव के बीच तय किए गए स्थल का डीएम ने अन्य विभागीय अफसरों के साथ निरीक्षण किया। उसके बाद करीब 12 बुलडोजर और 100 से अधिक कर्मचारियों को लगाकर कार्यक्रम स्थल तैयार किया जाने लगा है। यहां हेलीपैड बनाया जाएगा और करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जनसभा स्थल बनाया जा रहा है। हेलीपैड से जनसभा स्थल तक खड़ंजा बिछाकर सड़क तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जिले के बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जागी है।
