'रविवार को आऊंगा मां', दो दिन से फोन कर रामकेश को गांव बुला रही थी मां, पर आई चित्रकूट से मौत की खबर
चित्रकूट के मानिकपुर में जड़ेरा बांध की नहर सुरंग में मछली पकड़ने गए तीन युवकों की मौत हो गई। नवरात्र ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
मानिकपुर में जड़ेरा बांध नहर सुरंग में तीन युवकों की मौत।
मछली पकड़ने के दौरान संकरी सुरंग में फंसे, बचाने का प्रयास।
परिवारों में शोक, सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही उजागर।
संवाद सूत्र, मानिकपुर (चित्रकूट)। नवरात्र की पूजा के लिए घर की सफाई-पुताई करानी थी। इसी काम के लिए मां-बाप पिछले दो दिन से रामकेश को फोन कर गांव बुला रहे थे। हर बार वह रविवार को आने की बात कहकर टाल देता था। माता-पिता को क्या पता था कि जिस बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं, उसकी मौत की खबर आएगी। शनिवार को जड़ेरा बांध की नहर की सुरंग में दो अन्य युवकों के साथ रामकेश की मौत ने परिवार की खुशियां छीन लीं।
भैरमपुर केशरुवा गांव निवासी रामकेश कोल तीन दिन पहले अपने ननिहाल हेला गांव में सोधी कोल के घर आया था। बिलखते पिता तीरथ और गुमसुम मां बेटनिया ने बताया कि उन्होंने दो दिन से फोन कर उसे घर बुलाया था। अब वह कभी नहीं लौटेगा। मजदूरी करने वाला रामकेश तीन बहनों में इकलौता भाई था। उसकी पत्नी बेसनिया भी चार साल पहले छह माह की बेटी को लेकर घर छोड़कर चली गई थी।
हेला गांव निवासी महेंद्र की पत्नी नीलू और उसके दो बेटों व दो बेटियों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं राजपाल की मां चुन्नी और पिता लवकुश बेटे को याद कर बिलख रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजपाल दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। शनिवार को उसे मानिकपुर जाकर पूजन सामग्री लाने के लिए कहा गया था, लेकिन वह सुबह बिना बताए महेंद्र और रामकेश के साथ बांध चला गया।
सुरंग में एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की आशंका
प्रत्यक्षदर्शी सुर्विजय कोल के मुताबिक, तीनों लोग एक के पीछे एक मछली पकड़ने के लिए सुरंग में घुसे थे। बाद में तीनों के शव पानी में पेट के बल बाहर निकले। रामकेश के पैर पर महेंद्र का हाथ था। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि संकरी सुरंग में फंसने के बाद तीनों ने एक-दूसरे को बाहर निकालने की कोशिश की होगी, लेकिन सफल नहीं हो सके। घटना के बाद दोनों परिवारों में मातम पसरा है। नवरात्र की तैयारी के बीच घरों में अब शोक छाया हुआ है।
नहीं सुरक्षा के इंतजाम
सिंचाई विभाग का जड़ेरा बांध गर्मी के दिनों में फूटा था तो कई बीघे की फसल में पानी भर गया था। यहां पर अक्सर ग्रामीण घूमने आते हैं और युवाओं की टोली बैठी रहती है। बारिश के दिनों से इस बांध की नहरों का संचालन बंद था। इसी बांध के पास दो शव भी बरामद हो चुके हैं। यहां सुरक्षा को कोई बाेर्ड तक विभाग ने नहीं लगवाया है। जेई मनोज कुमार कहते हैं कि बगदरी का विजय नामक चौकीदार तैनात है। घटना के समय वह अपने घर नित्य क्रिया के लिए चला आया था। अक्सर चौकीदार युवकों को बांध की नहर में उतरने से रोकता भी है। सुरक्षा को दर्शाने के लिए कोई बोर्ड नहीं लगा है।
