'मुझे नेताओं में नायक कम खलनायक अधिक दिखते हैं', बिजनौर में बोले- स्वामी राजराजेश्वराश्रम
स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने बिजनौर में अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम में नेताओं पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें ...और पढ़ें

बिजनौर के नुमाइश मैदान में अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह में मंचासीन शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वराश्रम और अन्य अतिथि। जागरण
HighLights
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम का आयोजन।
शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने भाजपा कार्यकर्ताओं के अनुशासन भंग करने पर भी की टिप्पणी।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम में शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने विचार व्यक्त किए। नुमाइश ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अशोक सिंहल के जीवन में घटित घटनाओं को अपने संबोधन में शामिल किया। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि 'इसे मेरी दृष्टि का दोष कहें या कुछ और कि मुझे नेताओं में नायक से ज्यादा खलनायक अधिक नजर आते हैं।'
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने भाजपा के कार्यकर्ताओं के द्वारा पहने जाने वाले कुर्ता-पजामा को लेकर भी टिप्पणी की। कहा कि आजकल इनके कपड़ों में इतना कलफ लगा होता है कि अगर किसी के सिर पर मार दें तो सिर ही फूट जाए।
अपना संबोधन शुरू करने के साथ ही जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर कुछ कार्यकर्ताओं को यहां से वहां जाता देखा तो शारदा पीठाधीश्वर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि गले में पटका डालकर यहां से वहां घूम रहे हो, अनुशासन भंग कर रहे हो, यहां पटका तुम्हें पटक देगा।
ऐसे ही बगल में बैठे चंपत राय के बारे में बात करते हुए कहा कि बिजनौर महात्मा विदुर की धरती है। मुझे चंपत को देखकर कई बार लगता है कि वह विदुर के ही वंश से हैं।
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उन्होंने अशोक सिंहल का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीराम मंदिर के लिए संघर्ष के दौरान उन पर लाठीचार्ज किया गया था। उनके रक्त की गारा श्रीराम मंदिर की नींव में लगी है।
आगे कहा कि इतिहास तो कोई भी लिख सकता है, लेकिन इतिहास अशोक सिंहल जैसे लोग ही बना पाते हैं। चाणक्य के कथन को उदाहरण देते हुए कहा कि जिस राष्ट्र का कोई नायक नहीं होता या जिस राष्ट्र के अनेक नायक होते हैं, उस राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित नहीं होता। उन्होंने कहा कि इसे मेरी दृष्टि का दोष कहें या कुछ और कि मुझे नेताओं में नायक से ज्यादा खलनायक अधिक नजर आते हैं।
