अशोक सिंहल ने श्रीराम मंदिर ही नहीं समरसता के लिए भी किया काम, बिजनौर में बोले- चंपतराय
Bijnor News: विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के शताब्दी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता चंपतराय ने ...और पढ़ें

कार्यक्रम को संबोधित करते विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय। जागरण
HighLights
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना बोले, आजादी के बाद देश में सबसे बड़ा श्री रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन हुआ।
शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने दिखावे से बचने और आत्म चिंतन के साथ आध्यात्मिक विचार करने की दी सीख।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल का जन्म शताब्दी कार्यक्रम नुमाइश ग्राउंड के मैदान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय ने कहा कि अशोक सिंहल की पहचान सिर्फ श्रीराम मंदिर की स्थापना के लिए किए गए संघर्ष के कारण हीं नहीं है, उन्होंने देश दुनिया में हिंदू समाज को जोड़ने का कार्य करते हुए सामाजिक समरसता पर जोर दिया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने भी अशोक सिंहल के जीवन को लेकर अपने संस्मरण सुनाए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप्र विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि देश की आजादी के बाद सबसे बड़ा अगर आंदोलन हुआ है तो वह श्री रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन हुआ। इसके पूरा केंद्र बिंदू अशोक सिंहल रहे।
कई बार मुझ से भी पूछा गया कि आप विधानसभा अध्यक्ष हैं, ऐसे में आपके लिए प्राथमिकता में क्या है। मंदिर या राजनीति। हमने हमेशा श्रीराम मंदिर को ही अपनी प्राथमिकता से सर्वोपरि बताया।
मुख्य वक्ता चंपतराय ने अशोक सिंहल के जीवन से जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया
मुख्य वक्ता चंपतराय ने भी अशोक सिंहल के जीवन से जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया। बताया कि जब पंजाब में हालात ठीक नहीं थे, तब उन्होंने हरिद्वार में संत सम्मेलन किया और अमृतसर तक संतों की यात्रा कराई थी। ताकि पंजाब में समरसता का भाव बना रहे। उनका जन्म मठ-मंदिरों की रक्षा के लिए हुआ था।
उन्होंने दिल्ली की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में स्थिति झंडे वाला मंदिर को कुछ बुरे लोगों ने कब्जा किए हुए था। तब अशोक जी ने ही जबरन उस मंदिर को कब्जा मुक्त कराया और अपनी बात तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक भी पहुंचाई थी। आगे कहा कि वह अपनी बात समझाने और मनवाने के लिए संतों से हमेशा मंथन करते थे। बाद में सभी से कहते कि यह संत समाज का निर्णय है।
श्रीराम मंदिर की नींव की गारा में अशोक सिंहल का रक्त शामिल:स्वामी राजराजेश्वराश्रम
स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने भी अशोक सिंहल के जीवन में घटित घटनाओं को अपने संबोधन में शामिल किया। उन्होंने इस दौरान देश में कोई सर्वमान्य हिंदू समाज का नेता न होने और नायक के स्थान पर खलनायक होने की बात कही। साथ ही भाजपा के कार्यकर्ताओं के द्वारा पहने जाने वाले कुर्ता-पजामा को लेकर भी टिप्पणी की। कहा कि आजकल इनके कपड़ों में इतना कलफ लगा होता है कि अगर किसी के सिर पर मार दें तो सिर ही फूट जाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर की नींव की गारा में अशोक सिंहल का रक्त शामिल है।
