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पिंजरे में गुलदार के साथ कैद होने पर राेने लगा कुत्ता, लेकिन बच गई उसकी जान 

By Rahul Shyam Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 13 Sep 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

Bijnor News: बिजनौर के परमावाला गांव में दस दिन पहले लगाए गए पिंजरे में आखिरकार एक गुलदार कैद हो गया, ...और पढ़ें

बिजनौर में पिंजरे में कैद गुलदार व उसके पीछे पिंजरे में बांधा गया कुत्ता। सौ. विभाग

बिजनौर में पिंजरे में कैद गुलदार व उसके पीछे पिंजरे में बांधा गया कुत्ता। सौ. विभाग

HighLights

  1. बिजनौर के परमावाला गांव में गुलदार पिंजरे में कैद।

  2. कुत्ते के लालच में आकर गुलदार पिंजरे में फंसा।

संवाद सूत्र, हरेवली (बिजनौर)। गांव परमावाला में दस दिन पहले वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में आखिरकार गुलदार कैद हो गया। कुत्ते के लालच में आकर गुलदार पिंजरे में फंस गया।

शनिवार सुबह ग्रामीणों ने गुलदार (Leopard) को देखकर वन विभाग को सूचना दी। कई घंटे तक गुलदार के साथ ही कुत्ता भी पिंजरे में कैद रहा, हालांकि उसकी जान बच गई लेकिन गुलदार को देखकर भयभीत होकर कुत्ता रोता रहा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। टीम ने गुलदार को बादीगढ़ वन चौकी में रखा है।

हरेवली के गांव परमावाला व आसपास के क्षेत्र में कई दिनों से गुलदार (तेंदुआ) देखा जा रहा था। गुलदार अभी तक कई बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों को मार चुका था। ग्रामीणों की मांग पर करीब दस दिन पहले वन विभाग ने गांव परमावाला के पास जंगल में पिंजरा लगाया था।

इतने दिनों से गुलदार के कैद ना होने से ग्रामीणों में भय बना हुआ था। वन विभाग ने पिंजरे में आवारा कुत्ता बांधा था, आखिरकार शनिवार तड़के कुत्ते के लालच में गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। ग्रामीण राम सिंह, सुनील कुमार, राजेंद्र सिंह आदि ने शनिवार सुबह खेतों पर जाते समय पिंजरे में गुलदार को देखा।

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जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी। गुलदार के कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। साहूवाला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रामवृक्ष राव ने बताया कैद हुआ गुलदार नर है, जिसकी उम्र करीब सात वर्ष है। गुलदार कुत्ते के लालच में पिंजरे में कैद हुआ है।

उन्होंने बताया कि गुलदार को पिंजरे समेत रेहड़ की बादीगढ़ वन चौकी में रखा गया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर गुलदार को छुड़वाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि दो गुलदार देखे जा रहे थे, अब दूसरे स्थान पर पिंजरा लगाया जाएगा।

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इस कारण बची कुत्ते की जान 

वन अधिकारियों ने बताया कि गुलदार को ललचाने के लिए कुत्ता बांधा गया था। लेकिन गुलदार के पिंजरे में आने पर कुत्ता या बांधे गए अन्य जानवर की जान नहीं जाती है। दरअसल पिंजरे में दो केबिन बने होते हैं। आगे बड़ा केबिन गुलदार को पकड़ने के लिए, जबकि पीछे वाला छोटा केबिन काेई जानवर बांधने के लिए होता है।

बीच में लोहे की राड लगी होती हैं, जिससे गुलदार एक ओर से कुत्ते के लालच में पिंजरे में आता है, तभी उसका खटका गिरने से गेट बंद हो जाता है। दूसरे केबिन में बंधे जानवर की जान भी बच जाती है।