बिजनौर में पिता की 90 बीघा जमीन पर कमलनाथ का नाम वारिस के रूप में दर्ज, भूमि हड़पने की साजिश का खुलासा
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम बिजनौर में उनके पिता की 90 बीघा भूमि के वारिस के रूप में दर्ज किया गया है।

HighLights
कमलनाथ का नाम पिता की 90 बीघा जमीन के वारिस के रूप में दर्ज।
तहसीलदार नजीबाबाद ने सुनवाई के बाद दिया आदेश।
जमीन हड़पने की साजिश में पूर्व प्रधान समेत कई गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। तहसीलदार नजीबाबाद ने सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम गांव अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला में उनके पिता महेंद्रनाथ की 90 बीघा भूमि के वारिस के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। राजस्व कर्मियों ने आदेश पर अमल करते हुए अभिलेखों में उनका नाम दर्ज कर दिया। पूर्व प्रधान समेत कई लोगों पर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
यह है पूरा मामला
महेंद्रनाथ के नाम गांव की खतौनी में 90 बीघा भूमि दर्ज थी। सात सितंबर 2004 को दिल्ली में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन इसके 22 साल बाद तक राजस्व अभिलेखों में उनका नाम बना रहा। इसी साल 18 मई को कमलनाथ ने तहसीलदार नजीबाबाद के न्यायालय में वाद दायर कर भूमि विरासत में दर्ज करने की मांग की थी।
उन्होंने स्वयं और अपनी बहनों नीता पुरी व रीता जोशी को वारिस बताते हुए नाम दर्ज करने का अनुरोध किया। तत्कालीन लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में महेंद्रनाथ के बाहरी होने और वारिसों के दूर रहने का उल्लेख करते हुए भूमि को विवादित बताया था।
फर्जी वसीयत के आधार पर दायर वाद खारिज
इसी भूमि पर मालिकाना हक के लिए धर्मपाल सिंह ने भी वाद दायर किया था। इस मामले में पूर्व प्रधान धर्मपाल सिंह, जसविंदर ढिल्लों, विजय शंकर और तत्कालीन हल्का लेखपाल के विरुद्ध नजीबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार कर चुकी है; अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
धर्मपाल सिंह ने महेंद्रनाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र पेश किया था, जो 10 अप्रैल 2003 को नजीबाबाद से जारी हुआ था। जबकि महेंद्रनाथ की मृत्यु सात सितंबर 2004 को दिल्ली में हुई थी। तहसीलदार ने धर्मपाल सिंह का वाद खारिज कर दिया।
