यूपी में मध्य प्रदेश के पूर्व CM कमलनाथ की जमीन हड़पने की साजिश, 5 माह तक अटकाए रखा विरासत दर्ज कराने का आवेदन
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील में 90 बीघा जमीन की विरासत दर्ज करने का आवेदन पांच माह तक लटका रहा।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ
HighLights
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 90 बीघा जमीन का विरासत आवेदन अटका रहा।
लेखपाल ने फर्जी वसीयत के आधार पर जमीन को विवादित बताया।
पुलिस ने जमीन हड़पने की साजिश में शामिल आरोपियों को पकड़ा।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। तहसील में ऐसा मकड़जाल है, जहां आम आदमी तो क्या, पूर्व मुख्यमंत्री भी उलझ गए? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की जमीन की विरासत दर्ज करने का आवेदन तहसील प्रशासन पांच माह तक लटकाए रखा।
लेखपाल ने जांच करने की बजाय विवादित लिखकर जमीन में पेंच फंसा दिया। उधर, बताया जा रहा है कि पुलिस ने तीसरे आरोपित जसविंदर को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद ही कई चौंकाने वाले राज सामने आ सकते हैं।
मध्यप्रदेश के जिला छिंदवाड़ा निवासी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को पूर्व प्रधान धर्मपाल सिंह, जसविंदर ढिल्लो, विजय शंकर व लेखपाल डेविड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनके पिता स्व. महेंद्रनाथ की नजीबाबाद तहसील के गांव अमी खानपुर में 90 बीघा जमीन है।
18 मई 2026 में पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसीलदार के यहां आवेदन किया गया। इस पर लेखपाल ने उक्त जमीन पर अन्य वाद भूमि विवादित लिखकर रिपोर्ट तहसीलदार के यहां प्रेषित कर दी। आरोपित धर्मपाल सिंह की ओर से 10 अक्टूबर 1998 में बनाई फर्जी वसीयत और महेंद्रनाथ का एक मृत्यु प्रमाणपत्र तहसील कोर्ट में दाखिल किया था।
फर्जीवाड़ा सामने आने पर पुलिस ने धर्मपाल और विजय शंकर को गिरफ्तार किया था। अब पुलिस पूर्व मुख्यमंत्री से जमीन हड़पने की साजिश को पूरी तरह बेनकाब करने में जुटी है। पहले जसविंदर सिंह ढिल्लो उक्त जमीन को काफी समय से बटाई की आड़ में जोत रहा था।
उसे तहसील की ओर से एक नोटिस मिला था। तब जसविंदर ने धर्मपाल से संपर्क किया। धर्मपाल ने जसविंदर और विजय शंकर से मिलकर एक फर्जी वसीयत बनवा ली। धर्मपाल ने जमीन पर छह महीने पहले मक्का की फसल बो दी और अपना कब्जा लिया।
इसी बीच भनक लगने पर पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से विरासत दर्ज करने का आवेदन किया गया। जमीन हड़पने के लिए आरोपितों ने लेखपाल डेबिड से तालमेल बैठा लिया।
लेखपाल ने स्व. महेंद्रनाथ को दूर रहने और आवेदन करने वालों को पता अलग रहने और कब्जा आरोपित का होने का हवाला देते हुए विवाद दर्शा दिया। जिस वजह से पांच माह तक पूर्व मुख्यमंत्री का आवेदन अटका रहा। नजीबाबाद कोतवाल अमित कुमार ने कहना है कि जांच की जा रही है।
तहसील कोर्ट में दिए गए वारिसान दस्तावेज
पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से नियुक्त पैरोकार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से नजीबाबाद तहसील कोर्ट में दिए गए वारिसान प्रमाणपत्र, कमलनाथ, उनके दोनों बहनों के आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज पेश किए हैं।
