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बिजनौर में गंगा का निर्मल जल, डॉल्फिन और घड़ियाल की मौजूदगी दे रही शुद्धता की गवाही; पीएच भी बेहतर

Published: Sat, 17 Oct 2026 01:30 PM (IST)

बिजनौर जिले में गंगा नदी का पानी निर्मल और शीतल है, जिसमें घुलित ऑक्सीजन की मात्रा जलीय जीवों के लिए उत्कृष्ट है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. गंगा जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा उत्कृष्ट है।

  2. डॉल्फिन और घड़ियाल की उपस्थिति शुद्धता दर्शाती है।

  3. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमित रूप से निगरानी करता है।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। जिले में बह रही गंगा की धारा का पानी निर्मल और शीतल है। गंगा जल में सभी तत्वों के मानक निर्धारित मात्रा से बहते हैं। खास बात यह है कि घुलित आक्सीजन की संख्या में नौ से ऊपर है। इस मात्रा से पता चलता है कि गंगा में जलीय जीवों के सांस लेने के आक्सीजन की मात्रा बहुत अच्छी है। गंगा में डॉल्फिन और घड़ियाल का कुनबा भी इसकी धारा के निर्मल होने की गवाही देता है।

गंगा, गाय और गायत्री को भारतीय संस्कृतिक का वाहक माना जाता है। उत्तर प्रदेश में गंगा की धारा सबसे पहले जिले के ही गांव सबलगढ़ से प्रवेश करती है। गंगा की धारा कई किलोमीटर तक सफर करके गंगा बैराज तक पहुंचती है। यहां से जलीय जलीय जीवों की अलग दुनिया शुरू होती है। गंगा में बैराज के पुल के पास मिट्टी के टीलों पर घड़ियाल आराम करते हुए दिखते हैं तो डॉल्फिन भी अठखेलियां करती हुई दिखती है।

इसके अलावा गंगी की धारा के किनारे बने वेटलैंड में मगरमच्छों का दिखना भी आम है। गंगा के पानी की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियमित निगरानी की जाती है। जिले में रह रहकर बरसात होती है और पहाड़ों का पानी भी गंगा में आता है। ऐसे में नदी की धारा में सिल्ट अधिक हो जाती है लेकिन इसके बाद भी पानी निर्मल बना हुआ है।

देशी-विदेशी पक्षियों का रहता है जमावड़ा

गंगा की धारा में के किनारे जिले में कई वेटलैंड भी बने हैं। हैदरपुर वेटलैंड भी यहां है जो रामसर साइट है। यहां पर देशी-विदेशी प्रजातियों की लगभग 326 प्रजाति मिलती हैं। गंगा के पानी को निर्मल रखने के लिए यहां जलज सफारी में मोटर इंजन के बजाए बैटरी वाली नाव चलाई जा रही है।

गंगा की धारा में बहुत निर्मल पानी बह रहा है। यहां पीएच, डीओ आदि बहुत अच्छे हैं। गंगा के पानी की निगरानी लगातार की जा रही है। गंगा में जलीय जीव डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ आदि लगातार दिखाई दे रहे हैं।

-गिरीश आर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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