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बिजनौर के भगवानपुर में ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर नदी पर बनाया पुल, 25000 रुपये हुए खर्च; एक हफ्ते में तैयार

Published: Mon, 19 Oct 2026 04:22 PM (IST)

ग्राम भगवानपुर के ग्रामीणों ने लेबड़ा नदी पर चंदा इकट्ठा कर एक अस्थायी लकड़ी का पुल बनाया है। यह पुल ...और पढ़ें

बढ़ापुर के ग्राम भगवानपुर में लकड़ी के अस्थायी पुल से गुजरता ग्रामीण। सौ. ग्रामीण

बढ़ापुर के ग्राम भगवानपुर में लकड़ी के अस्थायी पुल से गुजरता ग्रामीण। सौ. ग्रामीण


HighLights

  1. ग्रामीणों ने लेबड़ा नदी पर अस्थायी पुल बनाया।

  2. खेतों और श्मशान घाट तक पहुंचना हुआ आसान।

  3. पुल निर्माण में 25 हजार रुपये और एक सप्ताह लगा।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। ग्राम भगवानपुर में ग्रामीणों ने लेबड़ा नदी पर चंदा इकट्ठा कर लकड़ियों का अस्थाई पुल बनाया है। ग्रामीणों को नदी का जलस्तर बढ़ने से अपने खेतों और श्मशान घाट तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

ग्राम भगवानपुर निवासी ग्रामीणों की अधिकांश भूमि लेबड़ा नदी के पार है। श्मशान घाट भी नदी के उस पार ही है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीण नदी पार नहीं कर पाते थे। वहीं गांव का गंदा पानी भी नदी में पहुंचता है, इस कारण नदी के दोनों किनारों पर कीचड़ जमा हो जाती है।

नदी का जलस्तर बढ़ने पर श्मशान घाट भी नही पहुंच पाते थे। घंटों नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता था। वहीं किसानों को खेतों पर जाने में परेशानी होती थी। इन्हीं समस्याओं से तंग आकर ग्रामीणों ने गांव में पंचायत कर अस्थायी लकड़ियों का छोटा पुल बनाने की ठानी।

घर-घर से एकत्रित किया चंदा

ग्रामीणों ने गांव में घर-घर से चंदा एकत्र किया और लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना शुरू किया। ग्रामीणों के अनुसार पुल तैयार करने में लगभग एक सप्ताह का लगा और करीब 20 से 25 हजार रुपये की लागत आई। ग्रामीणों ने पानी में लोहे के पाईप लगाए और किनारों पर लकड़ी लगाई है।

चलने के लिए भी लकड़ी व उनके ऊपर लोहे की जाली लगाई है, ताकि पैर नहीं फिसले। पुल पर पैदल दो से तीन व्यक्ति आसानी से गुजर सकते हैं। किसान चारा लेकर भी पैदल आसानी से गुजर सकते हैं।

अधिकारी बोले-

लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व में ऐसी कोई नदी नहीं है, जिस पर क्षेत्रीय नागरिकों को स्वयं से अस्थायी पुल बनाना पड़े।

-राजकुमार, एई, पीडब्लूडी नजीबाबाद

ग्रामीणों ने कहा

लेबड़ा नदी पर पुल नहीं होने से बरसात में खेतों और श्मशान घाट तक पहुंचने में ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी। गंदे पानी एवं कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता था। पानी ज्यादा होने पर खो नदी या बाहर जाना पड़ता है।

-ओमप्रकाश सिंह, ग्रामीण

ग्रामीणों को खेती बाड़ी करने के लिए जाना मुश्किल हो जाता था। पशुओं के लिए चारा भी नहीं ला पाते थे, अब ग्रामीणों ने पैदल चलने के लिए लकड़ी का पुल बनाया है। इससे काफी सहूलियत हुई है।

-मौहम्मद हारून, ग्रामीण

बरसात के पानी के साथ-साथ गांव का गंदा पानी नदी में पहुंचता है नदी के दोनों ओर कीचड़ जमा रहता है, अभी भी परेशानी बनी हुई है। इस पर छोटा पुल या स्थायी रपटा बनना चाहिए।

-कांता प्रसाद, ग्रामीण

लकड़ी के पुल से ग्रामीणों की कुछ परेशानी कम हुई है। पुल से पैदल आना जाना हो जाता है, लेकिन बैल-बुग्गी या ट्रैक्टर आदि नहीं जा सकता है। शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

-तैयब अली, ग्रामीण

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