यूपी के बिजनौर में नांगल जट और झालू समाज ने मृत्युभोज को बताया सामाजिक कुप्रथा, बंद करने का लिया निर्णय
बिजनौर के नांगल जट और झालू में जाट समाज व सर्वसमाज की बैठकों में मृत्युभोज जैसी कुप्रथा को बंद करने का निर्णय लिया गया है।

HighLights
नांगल जट और झालू में मृत्युभोज बंद करने का निर्णय।
शोकग्रस्त परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने का उद्देश्य।
शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की सहायता पर धन खर्च करने की अपील।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। गांव नांगल जट स्थित हनुमान मंदिर में जाट समाज की बैठक में मृत्युभोज बंद करने का निर्णय लिया गया। किसान नेता बिट्टू चौधरी ने कहा कि मृत्युभोज जैसी प्रथाओं के कारण शोकग्रस्त परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति कुरीतियां निभाने में नहीं बल्कि समय के साथ सकारात्मक बदलाव अपनाने में है।
वक्ताओं ने मृत्युभोज जैसी प्रथाओं को छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, जरूरतमंदों की सहायता और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर धन खर्च करने की अपील की।
कहा कि किसी दिवंगत व्यक्ति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि दिखावे और भोज में नहीं बल्कि उसके अच्छे संस्कारों, विचारों और समाजहित में किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने में है।
समाज के लोगों से इस पहल को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक बदलाव में सहभागी बनने का आह्वान किया गया। बैठक की अध्यक्षता भीम सिंह व संचालन सुरेश कुमार ने किया। बैठक में किसान नेता मनोज कुमार, लोचन वीर, डा.भूपेंद्र सिंह, संजीव सेठ, गजेंद्र सिंह, नरेश कुमार, लोकेंद्र सिंह, वरुण कुमार आदि उपस्थित रहे।
झालू में भी मृत्युभेज बंद
मुहल्ला चौधरियान स्थित धर्मशाला में सर्वसमाज की बैठक में मृत्युभोज की परंपरा बंद करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी परिवार में निधन होने पर परिजन पहले ही गहरे दुख में होते हैं। ऐसे समय में सामाजिक परंपरा के नाम पर होने वाला अतिरिक्त खर्च परिवार की परेशानी को और बढ़ा देता है।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ऐसी कुरीतियों को रोकना जरूरी है। बैठक की अध्यक्षता चेतन सिंह व संचालन ज्ञानेश्वर सिंह ने किया। बैठक में लाखन सिंह, किसान नेता कामेंद्र सिंह, मुनेंद्र सिंह, मनोज कुमार, संजीव प्रधान, ओमपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
