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भदोही जिला अस्पताल में खून की कमी कहकर प्रसूता को लौटाया, सड़क किनारे हुआ प्रसव

Published: Thu, 01 Oct 2026 07:47 AM (IST)

ज्ञानपुर के जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स ने खून की कमी बताकर प्रसव पीड़ा से कराहती वनवासी महिला को भर्ती ...और पढ़ें

महिलाओं ने चादर की ओट करके सड़क किनारे कराया प्रसव। जागरण

महिलाओं ने चादर की ओट करके सड़क किनारे कराया प्रसव। जागरण  

HighLights

  1. जिला अस्पताल ने खून की कमी बताकर प्रसूता को लौटाया।

  2. प्रसव पीड़ा से कराहती महिला ने सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया।

  3. सीएमओ ने हस्तक्षेप कर जच्चा-बच्चा को भर्ती कराया, जांच के आदेश।

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही)। महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल ज्ञानपुर में स्टाफ नर्स, चिकित्सक ने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया। मंगलवार की देर रात जोरईं गांव की प्रसव से कराहती 20 वर्षीय वनवासी महिला रानी देवी अपने स्वजन के साथ जिला अस्पताल पहुंची थी। यहां स्टाफ नर्स ने यह कहकर लौटा दिया कि खून की कमी है, मरीज को बीएचयू ले जाओ।

इससे नाराज स्वजन ने हंगामा किया लेकिन कोई जिम्मेदार वहां नहीं पहुंचा। वे प्रसूता को लेकर घर जाने लगे कि अस्पताल गेट के बाहर उसे ज्यादा पीड़ा होने लगी। महिलाओं ने चादर की ओट करके सड़क किनारे उसका प्रसव कराया और जच्चा बच्चा को लेकर घर चले गए।

जानकारी पर सीएमओ उसके घर पहुंचे और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सक ने उसे प्लाज्मा चढ़ाया। स्टाफ नर्स व चिकित्सक की लापरवाही पर सीएमओ ने चार सदस्यीय टीम बनाकर जांच बैठा दी है। कहा कि जांच रिपोर्ट पर दाेषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उधर स्वजन ने नर्स पर आरोप लगाया कि मुसहर का प्रसव नहीं करती यह कहकर उन्हें यहां से भगा दिया गया।

रानी व उसके स्वजन सोमवार को जिला अस्पताल आए थे। यहां चिकित्सक ने उसकी जांच की, बताया कि खून की कमी है, इससे उसे मीरजापुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस से मीरजापुर पहुंचे लेकिन वहां उसे भर्ती नहीं लिया गया।

इससे स्वजन घर लौट गए और फिर से पीड़ा उठने पर सरकारी एंबुलेंस से मंगलवार की रात जिला अस्पताल पहुंचे। यहां स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे भर्ती लेने से मना कर दिया। प्रसूता के भाई विजय कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स नीलम मौर्या ने मुसहर होने का हवाला देते हुए प्रसव से इनकार कर दिया था।

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उधर सड़क पर सड़क पर प्रसव होने की जानकारी होते ही स्वास्थ्य कर्मियों में खलबली मच गई। सीएमओ डा. एसके चक ने अस्पताल में जानकारी लेने के साथ उसके घर पहुंच गए और उसे व बच्चे को घर लाकर यहां भर्ती कराया। इमरजेंसी वार्ड में प्रसूता व बच्चे को भर्ती कराने के साथ-साथ उन्हें उचित उपचार का निर्देश दिया। पुलिस व पूर्व प्रधान रामधनी यादव ने नाराज स्वजन को समझा-बुझाकर शांत कराया।

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पूरे प्रकरण की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। एसीएमओ डा. ओपी शुक्ल, डिप्टी सीएमओ डा. आरबी पाठक, डा. रामाशीष सरोज, महिला रोग विशेषज्ञ डा. शालिनी पाठक हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महिला व बच्चा 24 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में हैं और दोनों स्वस्थ हैं।

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- डा. एसके चक, सीएमओ।

प्रकरण गंभीर है। इसके लिए जांच टीम गठित की गई है। संबंधित नर्स, चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली की जांच होगी। जांच रिपोर्ट आने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

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- शैलेश कुमार, डीएम।