बस्ती में नौकरी छोड़ एमकॉम पास युवा ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, अब हर साल कमा रहे लाखों
उच्च शिक्षित देवांश पांडेय ने नौकरी छोड़कर बस्ती में ड्रैगन फ्रूट की खेती को आय का माध्यम बनाया। उन्होंने आधुनिक ...और पढ़ें

ड्रैगन फ्रूट के खेत में फलों का निरीक्षण करते देवांश पांडेय। जागरण
HighLights
उच्च शिक्षित देवांश ने नौकरी छोड़ ड्रैगन फ्रूट खेती को चुना।
आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर डेढ़ एकड़ से लाखों का मुनाफा कमाया।
ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी बनाकर अन्य किसानों को पौधे उपलब्ध कराए।
अरुण सिंह, बभनान, बस्ती। परंपरागत खेती से इतर आधुनिक कृषि तकनीक और नवाचार को अपनाकर गौर ब्लाक के कोठवा गांव के रहने वाले युवा किसान देवांश पांडेय सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त देवांश ने नौकरी की तलाश तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि खेती में नए प्रयोग कर इसे बेहतर आय का माध्यम बनाया। करीब तीन वर्ष पहले शुरू की गई ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें लाखों रुपये की आमदनी हो रही है। उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
देवांश पांडेय ने एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ से एमकाम व बीएड की शिक्षा ग्रहण की। पढ़ाई के साथ खेती में उनकी रुचि ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने आधुनिक और व्यावसायिक खेती को अपनाते हुए ड्रैगन फ्रूट उत्पादन का निर्णय लिया। पिता गौर ब्लाक के एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। तीन वर्ष पहले उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार के सामने परिस्थितियां बदलीं, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने खेती को नए तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और आधुनिक खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
वर्ष 2023 में देवांश ने करीब डेढ़ एकड़ भूमि में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए थे। उस समय क्षेत्र में इस फल की खेती करने वाले किसान बहुत कम थे। स्थानीय स्तर पर पौधे उपलब्ध न होने के कारण उन्हें बाहर से पौधे मंगाने पड़े। एक पौधे की कीमत करीब 90 रुपये भुगतान करना पड़ा। परिवहन पर भी काफी खर्च हुआ।
पौधों की खरीद, खेत की तैयारी, संरचना निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर डेढ़ एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने में करीब 12 लाख रुपये की लागत आई थी। मेहनत और धैर्य का परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। वर्ष 2024 से पौधों में फल आने शुरू हो गए। दूसरे वर्ष में ही उन्होंने डेढ़ एकड़ खेत से करीब 15 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन किया।
बाजार में इसकी मांग अच्छी होने के कारण खरीदार सीधे उनके खेत तक पहुंचने लगे। करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से फल की बिक्री हुई। इससे उन्हें करीब साढ़े छह लाख रुपये मुनाफा हुआ।

सह फसली खेती भी
ड्रैगन फ्रूट की खेती की एक और खासियत यह है कि पौधों के बीच करीब आठ फीट की दूरी रहती है। ऐसे में खाली स्थान का उपयोग दूसरी फसलों के लिए करते हैं। फल का सीजन न होने पर वह खेत में लहसुन और प्याज की फसल उगाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करते हैं।
20 वर्ष तक हो सकता है उत्पादन
पौधे लगाने के करीब तीन वर्ष बाद प्रति एकड़ औसतन पांच से सात टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पौधे करीब 20 वर्ष तक उत्पादन देते हैं, जिससे इसे दीर्घकालिक और लाभकारी खेती माना जाता है। ड्रैगन फ्रूट का मुख्य उत्पादन दिसंबर से जून तक होता है, जिससे किसानों को लंबे समय तक बाजार उपलब्ध रहता है।
यह है उत्पादन खर्च
डेढ़ एकड़ में तैयार बाग की सालभर देखभाल, खाद, सिंचाई और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब एक लाख रुपये खर्च आता है। इसके बावजूद उत्पादन और बाजार मूल्य को देखते हुए यह खेती लाभ का अच्छा माध्यम साब है। अच्छी गुणवत्ता का फल होने के कारण खरीदार खेत से ही इसे खरीदकर ले जाते हैं।
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ड्रैगन फ्रूट की तैयार होती है नर्सरी
देवांश ने अपनी खेती को केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा है। वह खेत में ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी भी तैयार करते हैं। पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए वह तैयार पौधे अन्य किसानों को उपलब्ध कराते हैं। इससे उन्हें फल बिक्री के अतिरिक्त आय भी हो रही है। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर पौधे उपलब्ध होने से अब अन्य किसानों को बाहर से महंगे पौधे मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
