काला नमक धान की खेती से महकी किसानों की किस्मत, बस्ती में लहलहाई फसल
बस्ती के रुधौली क्षेत्र में काला नमक धान की खेती किसानों के लिए समृद्धि की नई उम्मीद बन रही है। ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
बस्ती में काला नमक धान की खेती से किसानों की आय बढ़ी।
सोनू मिश्रा ने 85 बीघा में की काला नमक धान की खेती।
किसानों को उचित बाजार और मूल्य के लिए सरकारी सहयोग की मांग।
शंकर यादव, बस्ती। अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाला काला नमक धान अब रुधौली क्षेत्र के किसानों के लिए समृद्धि की नई उम्मीद बन रहा है। पारंपरिक खेती से हटकर कुछ किसान अब इस विशेष प्रजाति की खेती को बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। विकास क्षेत्र के हसनी गांव निवासी उन्नतशील किसान सोनू मिश्रा ने इस वर्ष करीब 85 बीघा भूमि में काला नमक धान की खेती कर क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है।
उनकी पहल से प्रभावित होकर आसपास के गांवों के किसान भी इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। महुआर गांव के किसान अभिष उर्फ सोनू पांडेय ने भी उनसे प्रेरित होकर करीब 60 बीघा में काला नमक धान लगाया है। दोनों किसानों ने मिलकर लगभग 145 बीघा में इसकी खेती की है।सोनू मिश्रा की पहल का असर अब गांव के छोटे किसानों में भी दिखाई देने लगा है।
हसनी गांव के रहमतुल्ला आठ बीघा, तुलसीराम यादव 12 बीघा, मुख्तार अहमद पांच बीघा, राम शोहरत चार बीघा और मोहित मिश्रा 20 बीघा में काला नमक धान की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा गांव के अन्य किसान भी इस फसल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। किसानों का मानना है कि खेती में विविधता लाकर और बाजार की मांग के अनुरूप फसल उगाकर आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
14 जून को डाली नर्सरी, 10 जुलाई से शुरू हुई रोपाई
किसान सोनू मिश्रा ने बताया कि उन्होंने 14 जून को काला नमक धान की नर्सरी डाली थी। इसके बाद 10 जुलाई से खेतों में रोपाई का कार्य शुरू कराया गया। इसकी फसल लगभग 165 दिनों में तैयार होती है। उन्होंने बताया कि काला नमक धान की खेती को लेकर क्षेत्र के किसानों में धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। पहले जहां किसान सामान्य प्रजाति के धान की खेती को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब इसकी विशेष पहचान और संभावनाओं को देखते हुए काला नमक की खेती की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।
बाजार की व्यवस्था हो तो बढ़ेगा खेती का रकबा
सोनू मिश्रा का कहना है कि काला नमक धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को किसानों के उत्पाद की उचित कीमत और बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना चाहिए। सबसे बड़ी समस्या उपज की बिक्री और उचित मूल्य प्राप्त करने की है। यदि सरकार की ओर से खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाए और किसानों को बाजार उपलब्ध कराया जाए तो क्षेत्र के अधिकांश किसान सामान्य धान की जगह काला नमक की खेती अपनाने के लिए आगे आएंगे। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ क्षेत्र में इसकी खेती का रकबा भी तेजी से बढ़ सकता है।
काला नमक चावल अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है। इसे एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत सिद्धार्थनगर जिले के विशेष उत्पाद के रूप में शामिल किया गया है। ऐसे में बस्ती के रुधौली क्षेत्र में इसकी खेती का बढ़ता दायरा कृषि विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
जरूरत है कि कृषि विभाग किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी जानकारी, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल सके। हसनी के सोनू मिश्रा की पहल अब आसपास के किसानों को भी खेती का नया रास्ता दिखा रही है।
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