उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या से विवाद के बाद पप्पू गिरधारी फरार, 800 करोड़ की आवासीय परियोजना पर मंडराया संकट
उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या से विवाद के बाद पप्पू गिरधारी फरार हो गया है, जिससे उसकी 800 करोड़ की आवासीय परियोजना पर संकट मंडरा रहा है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
मंत्री रेखा आर्या से विवाद के बाद पप्पू गिरधारी फरार हो गया।
उसकी 800 करोड़ की आवासीय परियोजना पर संकट मंडरा रहा है।
मंत्री ने उत्पीड़न, एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।
नीलेश प्रताप सिंह, बरेली। उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के उत्पीड़न का आरोपित गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी फरार है। इससे उसकी साझेदारी वाली 800 करोड़ की आवासीय परियोजना को लेकर भी कयास लगाए जाने लगे हैं। वह मंत्री का पति होने के कारण रियल एस्टेट कारोबार में हनक रखता था, मगर अब परिस्थितियां विपरीत हो चुकीं।
मंत्री रेखा आर्या 15 अक्टूबर को उस पर उत्पीड़न व एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करा चुकीं। उन्होंने पप्पू गिरधारी पर फर्जीवाड़ा कर कंपनी के निदेशक पद से हटाने का आरोप भी लगाया, जो रियल एस्टेट कारोबार में कानूनी पेंच फंसा सकता है। पप्पू गिरधारी ने अपनी फर्म कृष्णा वैष्णवी इन्फ्रा डेवलपर्स के नाम से बरेली-सीतापुर हाईवे पर लालपुर गांव के पास पांच एकड़ में फार्म हाउस बनवाया था।
इस फर्म में उसका भतीजा सत्येंद्र राठौर व रेखा आर्या भी निदेशक थीं। मानचित्र स्वीकृत नहीं होने के कारण फार्म हाउस का निर्माण अवैध माना जा चुका, जिसका कंपाउंडिंग लंबित है। अब लालपुर-अधलखिया गांव के पास उसकी साझेदारी वाली ओमेक्स टाउनशिप चर्चा में आई है।
डीपीआर पर होता है मंथन
बरेली विकास प्राधिकरण के रिकार्ड अनुसार, 71.78 एकड़ भूमि पर बसने वाली इस परियोजना में नौ साझेदारों के नाम से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा की गई। इसमें रेखा आर्या, सत्येंद्र राठौर का नाम भी दर्शाया गया। नियमानुसार, ऐसी वृहद परियोजना को महायोजना के मानक के अनुसार रखना अनिवार्य है। इसके दृष्टिगत डीपीआर पर मंथन होता है।
15 अक्टूबर को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में परियोजना का प्रस्ताव पास कर दिया गया, अब इसका कार्यवृत्त जारी होगा। इसके उपरांत शासन से अनुमति लेकर मानचित्र आदि पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, 800 करोड़ की अनुमानित लागत वाली परियोजना को दो चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव दिया गया है।
इसके ले-आउट प्लान, भूमि उपयोग परिवर्तन और 33 केवी सब स्टेशन जैसी सुविधाओं के प्रविधानों की समीक्षा की जा रही है। सभी साझेदारों की भूमि के स्वामित्व, कागजों की जांच आदि भी होनी है। परियोजना के साझेदारों में गिरधारी लाल साहू का नाम आठवें स्थान पर दर्ज है।
यह भी पढ़ें- बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगा तो रो पड़े सपा प्रत्याशी, बोले- खुद को महसूस कर रहा पाकिस्तानी आतंकी; करूंगा धर्म परिवर्तन
उसके नाम पर 0.7477 हेक्टेयर यानी करीब 1.848 एकड़ भूमि का स्वामित्व दर्शाया गया है। टाउनशिप नीति के तहत ओमेक्स के न्यूनतम 60 प्रतिशत भूमि स्वामित्व की शर्त के संदर्भ में इस जमीन को भी शामिल किया गया है।
