विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रामगंगा प्रदूषण मामले में ग्रीन ट्रिब्यूनल का कड़ा रुख, बरेली समेत कई जिलों के डीएम को नोटिस

Published: Fri, 03 Apr 2026 08:47 AM (IST)

रामगंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, बरेली। रामगंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने नदी में लगातार हो रहे प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए बरेली समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता अभीष्ट कुसुम गुप्ता की ओर से ट्रिब्यूनल में दाखिल मूल आवेदन में आरोप लगाया गया है कि रामगंगा नदी में बड़े पैमाने पर बिना शोधन का घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरा डाला जा रहा है। इससे नदी का जलस्तर और गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है।

आवेदक ने अपने पक्ष में समाचार कटिंग और फोटो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। मामले में प्रदूषण के मुद्दे को खास तौर पर काशीपुर, मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और हरदोई के नदी तटवर्ती क्षेत्रों से जोड़ा गया है, जहां नगर निकायों और औद्योगिक इकाइयों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

तीन जिलों के डीएम को नोटिस जारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता भंवर पाल सिंह जादौन ने मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, सहारनपुर और हरदोई के जिलाधिकारियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा।

यह भी पढ़ें- बरेली से लंदन तक: अब ग्लोबल किचन की शान बनेंगे 'झुमका बासमती' और 'तिलक चंदन' चावल

ट्रिब्यूनल ने आवेदक को निर्देश दिया है कि शेष प्रतिवादियों को भी नोटिस की सेवा सुनिश्चित करें और अगली सुनवाई तीन अगस्त 2026 से कम से कम एक सप्ताह पहले सेवा का शपथपत्र दाखिल करें।

साथ ही जिन प्रतिवादियों के अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार किया है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर मूल आवेदन और सभी परिशिष्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई आगामी तीन अगस्त को होगी, जिसमें राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब पेश करने की उम्मीद है।