बरेली से लंदन तक: अब ग्लोबल किचन की शान बनेंगे 'झुमका बासमती' और 'तिलक चंदन' चावल
लंदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में बरेली की दो कंपनियों ने भाग लिया। स्पाइस विस्ता ने अपनी प्रसिद्ध मिर्च ...और पढ़ें

लंदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में प्रमाण पत्र प्राप्त करते बरेली के डा. अनिल साहनी और खाद्य प्रदर्शनी में शामिल बरेली के आकाश अग्रवाल
HighLights
झुमका बासमती, तिलक चंदन सुगंधित लघु दाना चावल भी रहा आकर्षण
अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में दो फूड प्रोसेसिंग कंपनियों ने किया प्रतिभाग
जागरण संवाददाता, बरेली। उत्तर प्रदेश से चुनिंदा पांच कंपनियों के प्रवर्तकों को अपने प्रतिनिधि के रूप में लंदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में शामिल कराया गया। इसमें बरेली की दो प्रोसेसिंग कपंनियों को प्रतिभाग कराया गया। स्पाइस विस्ता कारपोरेशन की प्रसिद्ध लाल मिर्च (78 नंबर) एवं पीली मिर्च को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया, जिनकी विशिष्ट सुगंध, प्राकृतिक रंग तथा संतुलित तीखापन को विदेशी खरीदारों से सराहा।
इसके साथ ही तेजा (एस-17) एवं एस-4 जैसी अन्य प्रचलित किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया। जबकि गाडसन आर्गेनिक फार्म द्वारा पेटेंट झुमका बासमती चावल, तिलक चंदन सुगंधित लघु दाना चावल का प्रदर्शन किया गया, जिन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली हुई।
राज्य ट्रांसफार्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह, मंडी परिषद के निदेशक इंद्र विक्रम सिंह के नेतृत्व में स्पाइस विस्ता कारपोरेशन के आकाश अग्रवाल और गाडसन आर्गेनिक फार्म के डा. अनिल साहनी ने लंदन में हुई प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया।
आकाश अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी एक समेकित शीत श्रृंखला एवं प्रसंस्करण इकाई के रूप में कार्य कर रही है, जिसे निर्यात को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शिता के साथ विकसित किया गया है।
इस आधुनिक इकाई में एआई आधारित मिर्च कलर सार्टेक्स मशीन स्थापित है, जो पूरे उत्तर भारत में अपने प्रकार की पहली और एकमात्र मशीन मानी जा रही है, जिससे मिर्च के रंग, गुणवत्ता और एकरूपता को उच्च स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है।
शीत भंडारण, सफाई, ग्रेडिंग, डंठल रहित प्रसंस्करण, कुचलन एवं पाउडर निर्माण तक की प्रक्रिया एक ही स्थान पर की जाती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता, स्थिरता तथा निर्यात योग्य मानकों को बनाए रखते हैं। बरेली की मिर्च को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं, जिससे बरेली की मिर्च को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है।
गाडसन आर्गेनिक फार्म के डा. अनिल साहनी ने अपनी कंपनी द्वारा विकसित पेटेंटेड धान की किस्म झुमका बासमती, लप्तप्राय किस्मों झुमका बसामती एवं तिलक चंदन सुगंधित लघु दाना चावल का प्रदर्शन किया।
उनका कहना है कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, पोलैंड, चीन तथा अमेरिका के खरीदारों द्वारा इन पारंपरिक जैविक धान किस्मों में विशेष रुचि प्रदर्शित की गई है। संस्थागत खरीदारों के साथ-साथ इन विशिष्ट धान किस्मों ने विश्वभर के प्रख्यात शेफ एवं पाक-कला विशेषज्ञों का भी ध्यान आकर्षित किया है।
उन्होंने बताया कि यह वैश्विक मंच उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करते हुए उनके उत्पादों के बेहतर मूल्य प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा। इससे पारंपरिक एवं विरासत कृषि उत्पादों की सतत वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि के साथ पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
इस सहभागिता के परिणामस्वरूप सकारात्मक व्यावसायिक संभावनाएं उभर कर सामने आई हैं। बरेली से प्रीमियम विरासत धान किस्मों के निर्यात के लिए अनेक व्यापारिक समझौते प्रारंभ हुए हैं, जो वैश्विक विशेष चावल बाजार में भारत की सशक्त उपस्थिति को और मजबूत करते हैं।
