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एक कागज, बिना कट या गोंद... Bareilly के 20 साल के युवा ने बनाई शिवाजी महाराज की 3D ओरिगामी!

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:13 PM (IST)

बरेली के 20 वर्षीय अभिजीत एस. वशिष्ठ ने जापानी कला ओरिगामी का उपयोग कर छत्रपति शिवाजी महाराज की त्रिआयामी आकृति ...और पढ़ें

घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज और अभिजीत एस वशिष्ठ। सौ. स्वयं

घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज और अभिजीत एस वशिष्ठ। सौ. स्वयं

HighLights

  1. शहर के युवा कलाकार ने जापानी कला ओरिगामी से कलाकृति में भरे कला, गणित और इंजीनियरिंग के रंग

  2. कला का विस्तार करते हुए युवा ने सोसाइटी आफ इंडियन ओरिगामी आर्टिस्ट्स की स्थापना की

जागरण संवाददाता, बरेली। एक ही कागज की शीट से घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज की त्रिआयामी आकृति बनाना गुलाब नगर निवासी 20 वर्षीय अभिजीत एस वशिष्ठ की कल्पनाशीलता, गणितीय समझ और वर्षों के अभ्यास का परिणाम है। लोग उन्हें ‘नारा ओरिगामी’ के नाम से पहचानते हैं, जो करीब 13 वर्षों से जापानी कागज-मोड़ कला की साधना कर रहे हैं।

उनके लिए ओरिगामी केवल कला नहीं, बल्कि ज्यामिति, अनुपात और संरचना की समझ से जुड़ा अध्ययन भी है। वह महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर भी काम कर चुके हैं। आकृतियों में उनकी पहचान और चरित्र उभारने पर उनका विशेष ध्यान रहता है।

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गुलाब नगर के रानी साहब का फाटक निवासी अभिजीत ने सेक्रेड हार्ट्स स्कूल से 2025 में इंटरमीडिएट किया। वह फिलहाल उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बचपन में उन्हें बोट और प्लेन बनाने का शौक था।

यूट्यूब देखकर उन्होंने ओरिगामी सीखी। उनके पिता ध्रुव कुमार निर्भीक और मां सोनी शर्मा हैं। वह बताते हैं कि छत्रपति शिवाजी की कलाकृति का डिजाइन विकसित करने में करीब दो वर्ष लगे और 14 से अधिक बार परीक्षण व सुधार किए गए।

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इसे बनाने में लगभग एक सप्ताह लगा। 100 सेंटीमीटर चौड़ी और 200 सेंटीमीटर लंबी विशेष शीट को बिना काटे या फाड़े मोड़कर घोड़ा, योद्धा और उनकी बारीकियां बनाई गईं। इंटरनेट मीडिया पर हजारों लोगों ने इसकी सराहना की। उनका उद्देश्य कला को वैश्विक स्तर पर ले जाना है।

विदेश तक निर्यात कर रहे ओरिगामी कागज

ओरिगामी को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सोसाइटी आफ इंडियन ओरिगामी आर्टिस्ट्स की स्थापना की है। इसका उद्देश्य कलाकारों, डिजाइनरों और शिक्षकों को साझा मंच देना और प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।

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सोसाइटी ने वर्ष 2026 में ‘वाघ’ राष्ट्रीय ओरिगामी प्रतियोगिता आयोजित की। अभिजीत ओरिगामी के लिए विशेष कागज भी तैयार करते हैं। पतंगी कागज को केमिकल प्रक्रिया से उपयोग के योग्य बनाया जाता है। वह वेबसाइट के माध्यम से इसका आनलाइन निर्यात करते हैं। कागज दुबई, फ्रांस, यूएस और जर्मनी तक भेजा गया है।

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क्या है ओरिगामी

ओरिगामी कागज को मोड़कर विभिन्न प्रकार की सुंदर और जटिल आकृतियां बनाने की एक पारंपरिक जापानी कला है। इसमें कागज की एक साधारण शीट को सिर्फ मोड़ने की कला का उपयोग किया जाता है। इसमें कैंची से काटने (कट्स) या गोंद (ग्लू) का इस्तेमाल नहीं होता है।

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